गोवंश की नृशंस हत्या पर ग्रामीणों का आक्रोश

हरदोई : उत्तर प्रदेश के कासिमपुर क्षेत्र के गौसगंज गाँव में, जहाँ इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने न केवल कानून को चुनौती दी है, बल्कि आस्था पर भी गहरा प्रहार किया है।

बेजुबान आवारा गोवंश यहाँ शांत पड़ा था, लेकिन इसे मौत की नींद सुला दिया गया। आरोप है कि इसी गाँव के वीरेंद्र कुमार उर्फ मुन्नू और उसके बेटे पीयूष ने मिलकर एक मासूम गोवंश पर भाले से वार किया और उसे तड़पा-तड़पा कर मार डाला।
सवाल ये है कि आखिर इतना दुस्साहस आया कहाँ से?
आज ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। गाँव वालों का साफ कहना है कि क्या कानून की चाबुक सिर्फ चेहरे देखकर चलती है? ग्रामीणों का तर्क सीधा और तीखा है—उनका कहना है कि अगर यही कृत्य किसी दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने किया होता, तो अब तक शायद आसमान सिर पर उठा लिया गया होता। तो फिर इन आरोपियों पर नरमी क्यों?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में 'जीरो टॉलरेंस' और 'गो-संरक्षण' की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं। लेकिन कासिमपुर पुलिस की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। ग्रामीण लिखित शिकायत दे चुके हैं, गवाह सामने हैं, और आक्रोश सड़कों पर है।
अब देखना यह होगा कि क्या बाबा का बुलडोजर या पुलिस का डंडा इन आरोपियों तक पहुँचता है, या फिर रसूख के दम पर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? क्या पुलिस वाकई न्याय करेगी या फिर इस 'खूनी खेल' पर पर्दा डाल दिया जाएगा?

रिपोर्टर : अनुराग सिंह 

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