विकास के नाम पर 'कागजी खेल', नगवा पंचायत में ₹23 लाख का बंदरबांट
हरदोई : जहां सरकार 'डिजिटल इंडिया' और 'पारदर्शी पंचायती राज' का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं हरदोई के कोथावां ब्लॉक की ग्राम पंचायत नगवा ने भ्रष्टाचार का एक ऐसा मॉडल पेश किया है जिसने पूरी व्यवस्था को ही आईना दिखा दिया है। बिना किसी एस्टीमेट, बिना कार्य पत्रावली और बिना तारीख वाले बिलों पर 23 लाख रुपये से अधिक की धनराशि ठिकाने लगा दी गई।
इस पूरे खेल में सबसे चौंकाने वाला पहलू 'हितों का टकराव' है। नियमों को ताक पर रखकर ग्राम प्रधान ने अपने ही निजी ईंट भट्ठे की ईंटें विकास कार्यों में खपा दीं। सरकारी धन का भुगतान भी अपने और करीबियों की फर्मों को किया गया, जो कि पंचायती राज नियमावली का सीधा उल्लंघन है।
अघोषित भुगतान: अक्टूबर 2025 से अब तक राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग के मद से करीब ₹29.78 लाख खर्च किए गए।
बिना तारीख के वाउचर: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर फीड किए गए बिलों में न तो तारीख दर्ज है और न ही वे क्रमवार हैं। यह सीधे तौर पर रिकॉर्ड में हेरफेर की ओर इशारा करता है।
कागजों पर हैंडपंप रीबोर: 'शिवम ट्रेडिंग कंपनी' को हैंडपंप मरम्मत और रीबोर के नाम पर ₹11.26 लाख का भुगतान किया गया, लेकिन धरातल पर इनके भौतिक सत्यापन में भारी विसंगतियां मिली हैं।
इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध: एस्टीमेट न होने के बावजूद कंसल्टिंग इंजीनियर को ₹16,006 का भुगतान किया गया। सवाल यह है कि जब एस्टीमेट बना ही नहीं, तो भुगतान किस आधार पर हुआ?
कहाँ थे ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी? इतनी बड़ी धनराशि बिना तारीख के वाउचर पर निकलती रही, लेकिन ब्लॉक स्तर पर बैठे अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या यह 'मौन सहमति' का हिस्सा है?
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह? पोर्टल को पारदर्शिता के लिए बनाया गया था, लेकिन यहाँ उसका उपयोग भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए किया गया। बिना वैध दस्तावेजों के भुगतान की प्रक्रिया डिजिटल गेटवे को पार कैसे कर गई?
वसूली और कठोर कार्यवाही कब? डीपीआरओ विनय कुमार सिंह ने प्रधान, पंचायत सचिव और फर्म के खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति जिलाधिकारी से की है। लेकिन क्या यह सिर्फ कागजी कार्यवाही बनकर रह जाएगी या जनता के टैक्स के पैसे की वसूली भी होगी?
डीपीआरओ की रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की पुष्टि कर दी है। अब गेंद जिलाधिकारी के पाले में है। ग्रामीण अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या दोषियों पर एफआईआर दर्ज होगी या विभागीय नोटिस के खेल में मामला दब जाएगा?
रिपोर्टर : अनुराग सिंह

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