हरीश राणा का निधन: 13 साल कोमा में थे, सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की दी थी मंजूरी

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आज गाजियाबाद के हरीश राणा ने अंतिम सांस ली। 13 साल से गहन कोमा में रहे हरीश ने अंततः इस दुनिया को अलविदा कह दिया। देश के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे यह अंतिम दिन संभव हो पाया।

Harish Rana Euthanasia Case: What Has Been Done So Far in the Harish Rana  Case? Supreme Court Approval, AIIMS Protocol & When His Final Day Could  Arrive

हरीश लंबे समय से एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के उपशामक देखभाल वार्ड में थे। पिछले एक हफ्ते से उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी और डॉक्टर्स की निगरानी में उन्हें रखा गया था। 23 मार्च को डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें कुछ और समय के लिए निगरानी में रखा जा सकता है। अंतिम छह दिनों में हरीश बिना खाना और पानी के जीवन यापन कर रहे थे। इस कठिन समय में उनके माता-पिता हर पल किसी चमत्कार की आस में डटे रहे।

Harish Rana: 'It's time to go now, okay?': Harish Rana's emotional farewell  with family as AIIMS begins passive euthanasia protocol | Delhi News - The  Times of India

हरीश की मां इस दौरान अस्पताल के गलियारे में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रही थीं। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, "मेरा बेटा अभी भी सांस ले रहा है, उसकी धड़कन चल रही है, लेकिन वह मुझे छोड़कर जा रहा है।"अंततः हरीश राणा ने कोमा और लंबी लड़ाई के बाद शांति प्राप्त की, और उनका यह सफर लाखों दिलों को झकझोर गया।

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