जूनियर इंजीनियरों का आंदोलन का ऐलान, उत्पीड़न और वेतन कटौती पर जताया विरोध
हाथरस में अधीक्षण अभियंता को सौंपा 18 पेज का ज्ञापन, 5 मई तक अल्टीमेटम, मांगें न मानी तो 6 मई से चरणबद्ध आंदोलन
हाथरस- राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन ने अवर अभियंता और प्रोन्नत अभियंताओं के खिलाफ हो रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। इसी कड़ी में संगठन की जनपद हाथरस टीम द्वारा केंद्रीय कार्यकारिणी के निर्देश पर शनिवार को अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार सिंह को 18 पेज का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने के दौरान इं. जितेंद्र कुमार, इं. प्रवेश कुमार, इं. सुमित सोनी, इं. अमित कुमार गुप्ता और इं. विनय बी लाल उपस्थित रहे।
संगठन ने चेतावनी दी कि जनपद हाथरस में किसी भी कार्मिक का उत्पीड़न हुआ तो संगठन आंदोलन के लिए सबसे आगे कतार में खड़ा रहेगा। ज्ञापन के माध्यम से तत्काल उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकने और लंबित मांगों के निस्तारण की मांग की गई।
दो जिलों की घटनाओं से बढ़ा आक्रोश ज्ञापन में कहा गया कि 30 अप्रैल को प्रयागराज जनपद में एक अवर अभियंता को विद्युत दुर्घटना के मामले में बिना निष्पक्ष जांच के दोषी मानकर निलंबित कर दिया गया। इससे आहत होकर अवर अभियंता ने आत्महत्या का प्रयास किया। इसी तरह मेरठ जनपद में मैनपावर और मटेरियल की भारी कमी के बावजूद कुछ समय के लिए विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर अवर अभियंता को निलंबित कर दिया गया। इन घटनाओं से जूनियर इंजीनियरों में भारी रोष है। केंद्रीय कार्यकारिणी ने 1 मई को आपात बैठक कर सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया।
संगठन की 9 सूत्रीय मांगें
1. वेतन कटौती पर रोक:
18 मार्च 2026 के आदेश से वितरण परिवर्तकों के क्षतिग्रस्त होने पर अवर अभियंताओं के वेतन से कटौती का प्रावधान किया गया है। संगठन का कहना है कि तकनीकी कारणों और ओवरलोडिंग से ट्रांसफार्मर फुंकते हैं, लेकिन इसका पूरा दायित्व कर्मचारियों पर डालकर मिसलेनियस चार्ज के रूप में वेतन से वसूली हो रही है। यह अनुचित है। संगठन ने 23 मार्च 2026 को दिए गए सुझावों को लागू करने और व्यवस्था सुधारने तक वेतन कटौती स्थगित रखने की मांग की।
2. उत्पीड़नात्मक कार्रवाई समाप्त हो:
मार्च 2023 में हुई सांकेतिक हड़ताल के कारण अवर अभियंता, प्रोन्नत अभियंता और अन्य कर्मियों पर हुई कार्रवाई को ऊर्जा मंत्री के आश्वासन के अनुरूप तुरंत समाप्त किया जाए। साथ ही 03 दिसंबर 2022 को हुए समझौते का अनुपालन सुनिश्चित हो।
3. निलंबन के बाद डिस्काम न बदला जाए:
बिना ठोस कारण के अवर अभियंताओं को निलंबन के बाद बहाल करते समय मुख्यालय को समर्पण कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसे तुरंत बंद किया जाए। दोषमुक्त होने या लघुदंड के साथ जांच समाप्त होने पर डिस्काम परिवर्तित न किया जाए।
4. फेशियल अटेंडेंस व्यावहारिक हो:
ऊर्जा क्षेत्र में कार्य की आकस्मिकता, जोखिम और संवेदनशीलता को देखते हुए फेशियल अटेंडेंस प्रणाली को व्यावहारिक बनाया जाए। 22 फरवरी 2026 को दिए गए सुझावों को लागू करने के बाद ही इसे ईआरपी यानी वेतन प्रणाली से जोड़ा जाए।
5. स्वीकृत मैनपावर उपलब्ध कराएं:
निर्बाध विद्युत आपूर्ति और दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए 15 मई 2017 के यार्ड स्टिक के अनुसार स्वीकृत मैनपावर प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सुरक्षा उपकरण, टीएंडपी और मटेरियल समय से उपलब्ध कराया जाए।
6. प्रभारी व्यवस्था बंद हो, रिक्त पद भरें:
अवर अभियंता प्रभारी की दोषपूर्ण व्यवस्था पर तुरंत रोक लगे। ऊर्जा निगमों में अवर अभियंताओं के भारी संख्या में रिक्त पदों को सीधी भर्ती या प्रोन्नति से तुरंत भरा जाए।
7. परिवर्तकों के रिपेयर SOP का पालन:
परिवर्तकों की मरम्मत के लिए 11 अप्रैल 2022 को जारी SOP का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
8. लाइन दुर्घटना में एकतरफा कार्रवाई बंद हो:
किसी भी दुर्घटना की निष्पक्ष जांच किए बिना सीधे अवर अभियंता को दोषी मानकर निलंबन या चार्जशीट की कार्रवाई अनुचित है। समुचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए।
9. मासिक द्विपक्षीय वार्ता:
स्थानीय स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए 27 जुलाई 2021 के शासनादेश के अनुसार संगठन प्रतिनिधियों के साथ प्रत्येक माह द्विपक्षीय वार्ता कर कार्यवृत्त जारी किया जाए।
तीन सूत्रीय तत्काल मांग
1. अवर अभियंता/प्रोन्नत अभियंताओं के खिलाफ सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकी जाए।
2. लंबित पत्राचारों पर अविलंब कार्रवाई कर संगठन को अवगत कराया जाए।
3. मैनपावर और मटेरियल की कमी प्राथमिकता पर दूर की जाए।
संगठन ने चेतावनी दी कि 05 मई 2026 तक मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 06 मई 2026 से केंद्रीय निर्देशों के अनुसार चरणबद्ध आंदोलन और विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी उच्च प्रबंधन की होगी। ज्ञापन में कहा गया कि फील्ड में कार्यरत अभियंताओं को इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई बार पत्राचार के बाद भी सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।


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