पुणे की महिला ने ग्रेनाडा में पति की रहस्यमयी मौत की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की

हवेली : पुणे की एक महिला ने अपने पति मनोज राजू अरने की मौत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जांच की मांग की है। मनोज अरने ग्रेनाडा में काम कर रहे थे, जो पूर्वी कैरेबियन में वेस्ट इंडीज के पास स्थित एक छोटा द्वीपीय देश है। उनकी पत्नी मोनिका मनोज अरने ने मेडिकल रिकॉर्ड, नियोक्ता के साथ संवाद, सामान की शिपमेंट और राजनयिक अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है।

मोनिका के अनुसार, उनके पति ने 31 अक्टूबर 2025 को उन्हें बताया था कि उन्हें ग्रेनाडा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि वह संपर्क में थे और 1 नवंबर को बताया कि 2 नवंबर को उन्हें छुट्टी मिल जाएगी और वे भारत लौट आएंगे। हालांकि, मोनिका का दावा है कि 2 नवंबर के बाद उन्होंने कॉल का जवाब देना बंद कर दिया। 3 नवंबर को उन्हें उनके नियोक्ता ‘बर्गेन हाउस’ के एक प्रतिनिधि का फोन आया, जिसमें बताया गया कि मनोज की मृत्यु अंतिम चरण के फेफड़ों के कैंसर से हो गई है। मोनिका का कहना है कि उन्हें पहले कभी किसी कैंसर की जानकारी नहीं दी गई थी।

चिकित्सा पारदर्शिता की कमी

मोनिका का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान या शव भारत भेजने से पहले उन्हें अपने पति से वीडियो कॉल पर बात करने की अनुमति नहीं दी गई। उनका कहना है कि अस्पताल के कागजात, डिस्चार्ज समरी, जांच रिपोर्ट, उपचार विवरण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज समय पर नहीं दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रारंभिक मृत्यु सूचना में अस्पताल की उचित पुष्टि और आधिकारिक मुहर नहीं थी।

अंग तस्करी का आरोप

मामला तब और गंभीर हो गया जब मोनिका ने दावा किया कि 18 नवंबर 2025 को उन्हें व्हाट्सएप कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को “सैमुअल” बताया। उसने कथित रूप से 1000 अमेरिकी डॉलर की मांग की और कहा कि उनके पति को अंग प्रत्यारोपण के लिए ले जाया जा रहा है। मोनिका का कहना है कि अब तक किसी भी प्राधिकरण ने इस दावे की औपचारिक जांच नहीं की है। पुणे पुलिस अधिकारियों ने कहा कि घटना भारत के बाहर हुई है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय जांच शुरू होने तक उनका अधिकार क्षेत्र सीमित है।

सामान की शिपमेंट पर विवाद

मामले का एक अन्य पहलू मनोज के सामान से जुड़ा है। मोनिका का आरोप है कि करीब 30 किलो सामान कूरियर से भेजा गया, लेकिन उसे निजी सामान की बजाय व्यावसायिक माल के रूप में दर्ज किया गया। उनका कहना है कि घोषित 30 किलो के मुकाबले केवल 23.6 किलो सामान मिला और कोई इन्वेंटरी सूची भी नहीं दी गई। लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसे जरूरी सामान गायब हैं। यह शिपमेंट 18 दिसंबर से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम क्लियरेंस में अटका हुआ है।

मोनिका ने बताया कि उन्हें अब तक सामान नहीं मिला है और उन्होंने कूरियर कंपनी में शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, उनसे चेकलिस्ट तैयार करने के लिए व्यावसायिक इनवॉइस की कॉपी मांगी गई, जबकि यह दस्तावेज भेजने वाले या संबंधित अधिकारियों से प्राप्त होना चाहिए था।

रोजगार और कानूनी स्थिति पर सवाल

मोनिका ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या उनके पति के पास वैध वर्क परमिट, श्रम बीमा और औपचारिक रोजगार अनुबंध था। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर नियोक्ता की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है।

राजनयिक संचार पर चिंता

उन्होंने राजनयिक अधिकारियों के साथ संवाद को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने ग्रेनाडा में भारत के अनिवासी उच्चायुक्त पसुपुलेती गीता किशोर कुमार के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया। उनके अनुसार, मामले से संबंधित संवाद पोर्ट ऑफ स्पेन स्थित भारतीय उच्चायोग के माध्यम से किया गया, जो ग्रेनाडा के लिए मान्यता प्राप्त है।

मोनिका का कहना है कि उन्हें अस्पताल सत्यापन, पोस्टमार्टम पुष्टि या नियोक्ता से संबंधित दस्तावेजों पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें स्थानीय अधिकारियों द्वारा मामले में हस्तक्षेप न करने को कहा गया। उन्होंने सभी रिकॉर्ड—जिनमें मेडिकल सत्यापन और आधिकारिक पत्राचार शामिल हैं—की स्वतंत्र रूप से राजनयिक माध्यमों से जांच की मांग की है।

समाचार प्रकाशित होने तक राजनयिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी, हालांकि स्पष्टीकरण के लिए उनसे संपर्क किया गया है।

दूतावास और पुलिस पर सवाल

मोनिका ने आगे आरोप लगाया कि ग्रेनाडा की पुलिस ने स्पष्ट अपडेट नहीं दिए, राजनयिक अधिकारी मुख्य रूप से नियोक्ता की जानकारी पर निर्भर रहे और मेडिकल रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मामलों में उस देश की एजेंसियों के साथ समन्वय जरूरी होता है, जहां मौत हुई है।

मोबाइल फोन लोकेशन पर संदेह

मोनिका ने यह भी संदेह जताया कि 10 नवंबर को मनोज के फोन पर मराठी नेटवर्क की टोन सुनाई दी, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह महाराष्ट्र में सक्रिय हो सकता था, जबकि माना जा रहा था कि वह ग्रेनाडा में है। उन्होंने कॉल रिकॉर्ड और डिवाइस ट्रैकिंग डेटा की जांच की मांग की है।

अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

उन्होंने ग्रेनाडा जाकर खुद अस्पताल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल लॉग और नियोक्ता से जुड़ी जानकारी की जांच करने की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा कि वह अपने पति की मौत के मामले में सच्चाई और न्याय चाहती हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी औपचारिक जांच के लिए भारतीय और ग्रेनाडा के अधिकारियों के बीच सहयोग आवश्यक होगा। अधिकारियों और नियोक्ता से प्रतिक्रिया मांगी गई है। मामला अभी जांच के दायरे में है और आगे के घटनाक्रम का इंतजार किया जा रहा है।

संवादाता : यश सोलंकी 

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