पत्नी के चरित्र और गर्भस्थ शिशु की पितृत्व पर संदेह करना पड़ा महंगा, पति को एक साल की सजा

हवेली : पुणे की एक अदालत ने अपनी पत्नी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के मामले में 28 वर्षीय युवक को एक वर्ष के कठोर कारावास तथा ₹8,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी पर अपनी पत्नी के चरित्र पर बार-बार संदेह करने और गर्भ में पल रहे बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने का आरोप था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) नरेश बारी ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी के चरित्र पर लगातार संदेह करना, उसके बच्चे के पितृत्व पर प्रश्न उठाना, दूसरी महिला से विवाह करने की इच्छा जताना तथा समाज में बदनाम करने की धमकी देना सामान्य वैवाहिक विवाद से कहीं अधिक गंभीर है और इसे क्रूरता की श्रेणी में माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार का व्यवहार महिला की गरिमा, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता का विवाह जून 2017 में हडपसर में धूमधाम से आरोपी के साथ हुआ था। विवाह समारोह पर उसके परिवार ने लगभग ₹20 लाख से ₹25 लाख तक खर्च किए थे तथा उसे 10 तोला सोने के आभूषण भी दिए गए थे।

शादी के लगभग दो सप्ताह बाद महिला को अपने पति के मोबाइल फोन में दूसरी महिला के साथ हुई बातचीत (चैट) मिली। जब उसने इस बारे में पति से सवाल किया, तो आरोपी ने कथित रूप से उसे धमकाया और उसके निजी मामलों में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी।

अभियोजन पक्ष ने आगे बताया कि महिला के गर्भवती होने के बाद आरोपी ने उसके चरित्र पर बार-बार संदेह व्यक्त किया और गर्भस्थ शिशु के पितृत्व पर सवाल उठाए। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भपात कराने का दबाव डाला। ये घटनाएं जून 2017 से अक्टूबर 2017 के बीच हुईं, जिसके बाद महिला ने येरवडा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक अनिल लोहार ने की थी। वहीं, सहायक लोक अभियोजक योगेश कदम ने अदालत में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व किया। सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और ₹8,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

 रिपोर्टर : यश सोलंकी 

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