श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन विदुर नीति और भक्ति का भावपूर्ण वर्णन

लेस्लीगंज - नीलांबर-पीतांबरपुर प्रखंड स्थित संकट मोचन महावीर मंदिर परिसर में संध्या समय चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तीसरे दिन का आयोजन अत्यंत भक्ति एवं श्रद्धा एवं सुंदर झांकी के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत थाना के एसआई राजू मांझी, अजय कुमार, महावीर मंदिर के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद सोनी, साधु चरण सोनी, यज्ञ पूजा समिति के अध्यक्ष सुदर्शन सोनी, अरविंद डिसिल्वा एवं संतु शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से भगवान की आरती कर की गई। कथा व्यास अनुराग कृष्ण शास्त्री ने महात्मा विदुर के ज्ञान, वैराग्य और भक्ति से जुड़े प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदुरजी को धर्मराज का अवतार माना जाता है, जिन्होंने धृतराष्ट्र को मोह-माया त्यागकर भगवान की शरण में जाने का उपदेश दिया। कथा के दौरान विदुर नीति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा गया कि विदुरजी ने दुर्योधन के अन्यायपूर्ण आचरण के कारण कुल विनाश की पूर्व चेतावनी दी थी। उन्होंने सदैव सत्य, धर्म और नीति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी तथा सांसारिक मोह-माया से दूर रहने का संदेश दिया। तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण विदुर-मैत्रेय संवाद रहा, जिसमें विदुरजी ज्ञान प्राप्ति के लिए मैत्रेय ऋषि से सृष्टि की उत्पत्ति, भगवान के विभिन्न अवतारों और उनकी महिमा के विषय में प्रश्न करते हैं। साथ ही विदुरजी की तीर्थ यात्रा और उद्धवजी से उनकी भेंट का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया, जहां वे भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर भाव-विभोर हो जाते हैं। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन में ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का संतुलन ही मोक्ष प्राप्ति का सच्चा मार्ग है। कथा स्थल पर भैया की पूजा के सभी पदाधिकारी एवं  बड़ी संख्या में  श्रद्धालु उपस्थित होकर भक्ति रस में सराबोर हुए।

रिपोर्टर - अवध किशोर 

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