न्याय की गुहार: मासूम की हत्या के 8 दिन बाद भी खाली हाथ पुलिस, बरही बंद से गूंजा आक्रोश
बरही/हजारीबाग- कुसुम्बा (विष्णुगढ़) की 12 वर्षीय मासूम छात्रा के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और नृशंस हत्या के मामले ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। घटना के आठ दिन बीत जाने के बाद भी हत्यारों की गिरफ्तारी न होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है।
इस अकर्मण्यता के विरोध में आज, 30 मार्च 2026 को बरही पूर्वी मंडल अध्यक्ष विजय यादव और पश्चिमी मंडल अध्यक्ष नागेश्वर रजक के नेतृत्व में 'संपूर्ण बरही बंद' का आयोजन किया गया।
बाजार बंद, सड़कों पर उतरा जनसैलाब
घटना के विरोध में बरही के व्यापारियों, प्रतिष्ठान स्वामियों और आम नागरिकों ने स्वतः अपनी दुकानें बंद रखकर इस न्याय की लड़ाई को अपना समर्थन दिया। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि क्या पीड़ित परिवार का अत्यंत गरीब होना, अल्पसंख्यक (गांव के संदर्भ में) और कमजोर वर्ग से होना ही वह कारण है जिसके चलते पुलिस अब तक सुस्त है?
प्रमुख नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने घेरा प्रशासन
बरही चौक पर चक्का जाम के दौरान भारी संख्या में लोग जुटे। इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल हुए:
रमेश ठाकुर (भाजपा जिला उपाध्यक्ष) एवं किशुन यादव (जिला परिषद उपाध्यक्ष)
गुरुदेव साव (विहिप जिला सहमंत्री)
मुखिया विजय यादव, मुन्ना यादव, ज्योतिष यादव और अन्य जनप्रतिनिधि।
वक्ताओं ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, "यदि हजारीबाग और विष्णुगढ़ पुलिस जल्द से जल्द दरिंदों को सलाखों के पीछे नहीं भेजती, तो आम जनता का कानून व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।"
आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी और पुलिस का आश्वासन
सड़क जाम और प्रदर्शन के दौरान बरही पुलिस ने सभी आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया। हालांकि, इस मौके पर पुलिस प्रशासन की ओर से यह ठोस आश्वासन दिया गया है कि हजारीबाग पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और अपराधियों को बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
बड़ा सवाल: न्याय में देरी क्यों?
एक 12 साल की बच्ची के साथ हुई इस हैवानियत ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। मासूम को न्याय दिलाने के लिए आज पूरा बरही एक सुर में खड़ा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'अल्टीमेटम' के बाद कितनी तत्परता दिखाता है।
रिपोर्टर राहुल राणा
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