बरही रेलवे स्टेशन पर भटकी 12 वर्षीय बच्ची को RPF और स्थानीय युवक की सूझबूझ से मिला परिवार

हजारीबाग : आज बरही रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ (RPF) के जवानों और एक स्थानीय युवक की तत्परता एवं सूझबूझ से एक बड़ी अनहोनी टल गई। ट्रेन से भटककर स्टेशन पहुँची एक 12 वर्षीय मासूम बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया।

स्टेशन पर अकेली घूम रही थी बच्ची
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज सुबह लगभग 9:30 बजे एक बच्ची बरही रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरी। वह काफी देर तक स्टेशन परिसर में इधर-उधर भटक रही थी। ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के सिपाही रूपेश कुमार सिंह की नजर जब काफी देर से अकेली घूम रही इस बच्ची पर पड़ी, तो उन्होंने संदेह होने पर उससे पूछताछ की।
घबराहट के कारण बच्ची लगातार अपनी बातों से पुलिस को उलझा रही थी; वह कभी अपना घर पदमा तो कभी सूरजपुरा बता रही थी। सही जानकारी न मिल पाने पर आरपीएफ जवान ने स्थानीय लोगों से संपर्क साधा, जिसके बाद स्टेशन पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सतेंद्र सिंह की सूझबूझ ने राह की आसान
भीड़ देखकर वहीं पास के रहने वाले सतेंद्र सिंह जानकारी लेने के उद्देश्य से वहाँ पहुँचे। उन्होंने बच्ची की मानसिक स्थिति को समझा और बेहद प्यार से लगभग एक घंटे तक उसे समझाया-बुझाया। सतेंद्र सिंह के अपनत्व भरे व्यवहार के बाद बच्ची ने आखिरकार अपना सही नाम भानू कुमारी उर्फ छोटी (उम्र लगभग 12 वर्ष) और पिता का नाम मुकुंद महतो बताया। उसने जानकारी दी कि वह तेनुघाट के चापी ग्राम की रहने वाली है।
संयोगवश सतेंद्र सिंह का नानीघर भी तेनुघाट में ही है। उन्होंने तुरंत अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर फोन के माध्यम से बच्ची के माता-पिता से संपर्क साधा और बच्ची की सही पहचान सुनिश्चित की।
जीजा को सौंपी गई मासूम*
परिजनों से बातचीत के दौरान पता चला कि बच्ची के जीजा राजेश प्रसाद पदमा में ही रेलवे में कार्यरत हैं। आरपीएफ ने तुरंत उनसे संपर्क कर स्टेशन बुलाया। इसके बाद आरपीएफ के सिपाही ने बच्ची के माता-पिता से दोबारा फोन पर बात की और उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत एक लिखित आवेदन लेकर बच्ची को सुरक्षित उसके जीजा राजेश प्रसाद के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने परिजनों को हिदायत दी कि बच्ची को समझा-बुझाकर अच्छे से रखें ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
> "बच्चों पर न बनाएं अत्यधिक दबाव" — सतेंद्र सिंह
> इस सफल रेस्क्यू के बाद स्थानीय नागरिक सतेंद्र सिंह ने बच्ची के माता-पिता से फोन पर बात कर उन्हें बच्ची को प्यार से रखने की सलाह दी। उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा— "आज की इस भाग-दौड़ और समस्याओं से भरी जिंदगी में अक्सर घरों का माहौल बिगड़ जाता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को घरेलू तनाव और माहौल से दूर रखें। बच्चों पर मानसिक दबाव ज्यादा न बनाएं, ताकि डर या तनाव में आकर बच्चे ऐसा आत्मघाती कदम न उठाएं।"

इस सराहनीय कार्य के लिए स्थानीय लोगों ने आरपीएफ सिपाही रूपेश कुमार सिंह और सतेंद्र सिंह की जमकर प्रशंसा की है।

रिपोर्टर : राहुल राणा 

 

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