प्रशासन बेअसर, जनता लापरवाह: धनबाद रोड बना 'डेथ ज़ोन', कपिल साव के पैर गंवाने के बाद भी नहीं सुधरे हालात

हजारीबाग - बरही प्रशासन और इंस्पेक्टर विनोद कुमार यादव द्वारा शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान जमीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद धनबाद रोड की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। यहाँ नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से बाजार सजाया जा रहा है,जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ स्थानीय लोग और दुकानदार जानबूझकर इन अभियानों को सफल नहीं होने देना चाहते। अस्पताल से लेकर चौक तक आधे रोड पर अवैध कब्जा अतिक्रमणकारियों की इस मनमानी का सबसे बुरा असर धनबाद रोड अनुमंडलीय अस्पताल से लेकर बरही चौक के चारों तरफ देखने को मिल रहा है। मुख्य सड़क के आधे हिस्से पर ई-रिक्शा (टेम्पू), बेतरतीब खड़ी मोटरसाइकिलें और सब्जी-फल खरीदने वालों के वाहनों का परमानेंट कब्जा रहता है। रही-सही कसर सड़क किनारे फेंके जाने वाले फल और सब्जियों के अवशेष पूरी कर देते हैं। इस मलबे को खाने के लिए आवारा मवेशी सड़क के बीचों-बीच जमा हो जाते हैं, जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है और पल भर में पूरा इलाका जाम के झाम में फंस जाता है। हादसों का गढ़ बनी सड़क: दो हफ्ते पहले युवक ने गंवाया पैर यह अव्यवस्था अब केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आम नागरिकों की जान से खिलवाड़ बन चुकी है। महज दो हफ्ते पहले इसी अनियंत्रित जाम और अव्यवस्था के कारण एक स्थानीय युवक कपिल साव भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गया, जिसमें उसे अपना एक पैर गंवाना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग पर पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद न तो प्रशासन कोई ठोस स्थायी समाधान निकाल पा रहा है और न ही अतिक्रमणकारियों में कोई खौफ दिख रहा है।

स्थानीय लोगों की मांग: 'दिखावे की कार्रवाई बंद हो, अब सीधे कटे चालान' बढ़ते हादसों और रोजाना के नरक जैसे जाम से त्रस्त स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का साफ कहना है कि बरही को व्यवस्थित करने के लिए अब प्रशासन को गांधीगीरी छोड़ सख्त कदम उठाने होंगे। 

लोगों ने मांग की है कि:

नो-पार्किंग और बेढंगे वाहनों पर तुरंत भारी चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की जाए। सड़क किनारे दुकान लगाने वाले सब्जी और फल विक्रेताओं को किसी निश्चित वेंडिंग ज़ोन में शिफ्ट किया जाए।अस्पताल और मुख्य चौक के आसपास व्यस्त समय में यातायात पुलिस की स्थायी गश्ती सुनिश्चित हो।

यदि प्रशासन ने केवल औपचारिक अभियान चलाने के बजाय अब भी कोई ठोस और कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो धनबाद रोड पर आगे भी इसी तरह बेकसूर लोग हादसों का शिकार होते रहेंगे।

रिपोर्टर - राहुल राणा 

 

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