इकलौता सहारा छिन गया.मायापुर सड़क हादसे ने उजाड़ दिया एक परिवार
हजारीबाग : चौपारण थाना क्षेत्र के पांडेयबारा स्थित मायापुर के समीप रबिवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने एक हंसते खेलते परिवार की खुशियां पलभर में छीन लीं। इस हादसे में चतरा जिले के इटखोरी थाना क्षेत्र के पथरिया गांव निवासी रंजीत विश्वकर्मा (38 वर्ष), पिता महावीर विश्वकर्मा, की दर्दनाक मौत हो गई। परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की असमय मौत से पत्नी, तीन छोटे बच्चों, वृद्ध माता-पिता और पूरे गांव पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।जानकारी के अनुसार रंजीत विश्वकर्मा बरही की एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। रबिवार को बरही से अपने घर पथरिया लौटने के दौरान जैसे ही वह चौपारण थाना क्षेत्र के पांडेयबारा स्थित मायापुर के पास पहुंचे, उनकी मोटरसाइकिल अचानक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भीषण था कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया,लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही चौपारण थाना पुलिस मौके पर पहुंची तब तक ग्रामीणों ने बरही पोस्टमार्टम के लिए बरही भेज दिया,पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद परिजन शव लेकर अपने पैतृक गांव पथरिया रवाना हो गए।
रंजीत विश्वकर्मा की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य पर गहरा आघात है। ग्रामीणों के अनुसार उनके पिता महावीर विश्वकर्मा लंबे समय से लकवाग्रस्त हैं और काम करने में असमर्थ हैं। ऐसे में घर की सारी जिम्मेदारी रंजीत के कंधों पर थी। उनकी कमाई से ही माता पिता का इलाज, बच्चों की पढ़ाई और पूरे परिवार का खर्च चलता था।मृतक अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी पांचों बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार में कमाने वाला दूसरा कोई नहीं है। रंजीत की असमय मौत के बाद परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
देर शाम जब रंजीत का शव उनके पैतृक गांव पथरिया पहुंचा तो पूरे गांव में मातम छा गया। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि तीनों मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया। बेटे की मौत से लकवाग्रस्त पिता और वृद्ध मां भी गहरे सदमे में हैं।ग्रामीणों ने बताया कि रंजीत मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने हमेशा परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी, लेकिन एक सड़क हादसे ने पलभर में पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया। गांव के लोगों की जुबान पर बस एक ही सवाल है—अब इस परिवार का भरण-पोषण कौन करेगा,ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता, सरकारी मुआवजा तथा बच्चों की शिक्षा और परिवार के पालन पोषण के लिए विशेष सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की जिंदगी को बिखेर देने वाली त्रासदी है।
रिपोर्टर : मुकेश सिंह
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