बरही रियाडा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्षेत्र का फायदा किसे? स्थानीय युवाओं के रोजगार का सवाल
हज़ारीबाग - बरही रियाडा क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने के पीछे सबसे बड़ी उम्मीद यह थी कि यहां उद्योग स्थापित होंगे, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। लेकिन आज स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस औद्योगिक क्षेत्र का वास्तविक लाभ यहां के लोगों को कितना मिला?
स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद क्षेत्र को रोजगार और विकास की उम्मीद थी, लेकिन इसके बदले प्रदूषण और वातावरण दूषित होने की समस्या अधिक दिखाई दे रही है। लोगों की शिकायत है कि जिस उद्देश्य से औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया था, उस अनुरूप ऐसी कंपनियों की संख्या नहीं बढ़ी, जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय शिक्षित एवं तकनीकी युवाओं को रोजगार मिल सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि रियाडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्टील प्लांट स्थापित हुए हैं। इन इकाइयों में मजदूरों को रोजगार तो मिला, लेकिन आरोप है कि इनमें बड़ी संख्या में दूसरे क्षेत्रों से आए श्रमिक कार्यरत हैं। यदि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रशिक्षण और रोजगार की व्यवस्था की जाती तो क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को अपने परिवार और गांव को छोड़कर दूसरे राज्यों एवं शहरों में रोजगार की तलाश में नहीं जाना पड़ता।
लोगों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में ऑटोमोबाइल से जुड़ी कंपनियां, वाहन फिटिंग एवं सर्विसिंग यूनिट, मशीनरी, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र और अन्य रोजगारपरक उद्योग स्थापित किए जाते तो आईटीआई एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसर पैदा हो सकते थे। कंपनियों द्वारा स्थानीय युवाओं को पहले प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था की जाती तो इसका सीधा लाभ क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को मिलता।
बरही रियाडा क्षेत्र में एचपी गैस की एक यूनिट भी स्थापित है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके संचालन में स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं कुछ स्थानीय लोगों द्वारा स्थापित छोटी औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है, जिससे यह साबित होता है कि यदि स्थानीय स्तर पर रोजगारपरक उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए तो बेरोजगारी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की स्पष्ट नीति की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के लिए स्थानीय जमीन और संसाधनों का इस्तेमाल होता है तो वहां के लोगों को उसका लाभ भी मिलना चाहिए। उद्योगों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। साथ ही मजदूरों को उचित वेतन, बीमा, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी नियम लागू होने चाहिए। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में खनन एवं औद्योगिक गतिविधियां होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। इससे परिवार बिखरते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है। आज हर परिवार की सबसे बड़ी जरूरत रोजगार है। किसी का बेटा, भाई, पति या पिता रोजगार के लिए घर से दूर जाने को मजबूर न हो, इसके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना जरूरी है।
जनप्रतिनिधियों की सोच में बदलाव की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब जनप्रतिनिधियों को पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों पर ध्यान देना होगा। केवल सड़क, नाली और भवन निर्माण से क्षेत्र का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। शिक्षा, रोजगार और उद्योग को विकास का प्रमुख आधार बनाना होगा।
बरही क्षेत्र में उपलब्ध भूमि और औद्योगिक संभावनाओं का बेहतर उपयोग करते हुए इसे एक व्यवस्थित इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए ऐसी कंपनियों को आमंत्रित करने की जरूरत है, जिनमें अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सके। साथ ही आईटीआई एवं अन्य तकनीकी संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को कंपनियों से जोड़ने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका लाभ उस क्षेत्र के आम लोगों तक पहुंचे। स्थानीय जमीन पर उद्योग लगे, स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण मिले, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और क्षेत्र के पर्यावरण की भी रक्षा हो—इसी संतुलित विकास की आज बरही को जरूरत है।
रिपोर्टर - अमित सिंह
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