शस्त्र पूजन के साथ राष्ट्रभक्ति व सामाजिक समरसता का दिया संदेश
बरही - विजयादशमी महोत्सव के पावन अवसर पर बरही में राष्ट्र सेविका समिति एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में शस्त्र पूजन उत्सव श्रद्धा, उत्साह और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान राष्ट्रसेवा, भारतीय संस्कृति, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता और संगठन की शक्ति का संदेश दिया गया। दोनों आयोजनों में वक्ताओं ने समाज को संगठित कर राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
राष्ट्र सेविका समिति ने महिलाओं में राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व जगाने पर दिया जोर
कृष्णापुरी, बरही स्थित त्रिवेणी साव के आवास पर राष्ट्र सेविका समिति की ओर से विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर कार्यवाहिका निशा कुमारी ने अपने बौद्धिक संबोधन में कहा कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:” अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। इसी आदर्श को आत्मसात करते हुए राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं को संगठित करने तथा उनमें राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है।
उन्होंने समिति की स्थापना और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना वर्ष 1936 में विजयादशमी के दिन महाराष्ट्र के वर्धा में वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर द्वारा की गई थी। उन्होंने कहा कि समिति देशभर में महिलाओं के व्यक्तित्व विकास, संगठन और राष्ट्रसेवा की भावना को मजबूत करने की दिशा में कार्यरत है। उनके अनुसार, वर्तमान में देशभर में समिति की 4,125 शाखाएं संचालित हो रही हैं। बरही में भी पिछले पांच वर्षों से प्रत्येक सप्ताह समिति की गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान शस्त्र पूजन, मां दुर्गा के भजन, अमृत वचन, सुभाषित, बौद्धिक संबोधन और प्रार्थना सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम का संचालन बरही सह नगर कार्यवाहिका सुश्री कशिश केशरी ने किया।
खेरौन-गोरियाकरमा शाखा में आरएसएस का शस्त्र पूजन उत्सव
वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से खेरौन-गोरियाकरमा शाखा में भी विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन उत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. सत्येंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि जिला बौद्धिक प्रमुख सुबोध पाण्डेय ने अपने संबोधन में संगठन की विचारधारा और सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 101 वर्षों से समाज में संगठन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और सेवा की भावना को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। संघ का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना तथा विभिन्न सेवा कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। कार्यक्रम में संगठन के विचारों को आत्मसात करते हुए स्वाभिमान के साथ जीवन जीने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर मुख्य शिक्षक प्रिंस सिंह, रोशन सिंह, अमरजीत सिंह, दीपक सिंह सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम प्रभु राणा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
संस्कृति, संगठन और सेवा का संकल्प
बरही में आयोजित दोनों कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण, महिलाओं की सक्रिय सामाजिक भागीदारी, राष्ट्रभक्ति तथा समाज में आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन के साथ संगठन और सेवा के संकल्प को दोहराते हुए समाज को एकजुट होकर राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा दी गई।
रिपोर्टर - राहुल राणा

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