सारा जीवन भी शुद्ध रहकर मां को खुश रखना हम सभी का परम कर्तव्य - बीके भीम भाई

हज़ारीबाग - प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केरेडारी के द्वारा महाअष्टमी की शाम दुर्गा पूजा समिति सलगा (सयानी मैदान) के मंच पर मां दुर्गा की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का आगाज केरेडारी प्रखंड प्रमुख सुनीता देवी , केरेडारी सीओ बिपिन चंद्र विश्वास और उनकी धर्मपत्नी , बड़कागांव सीओ मनोज कुमार और उनकी धर्मपत्नी, सलगा पंचायत की मुखिया सह संरक्षक पार्वती देवी, उपमुखिया जागेश्वर कुमार महतो , प्रमुख प्रतिनिधि सह समाजसेवी प्रेम रंजन पासवान, दुर्गा पूजा समिति सलगा के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद साहू , सचिव राजेंद्र कुमार , कोषाध्यक्ष बलराम साहू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन और फीता काटकर किया। सभी ने दीप प्रज्वलन के बाद एक मिनट ईश्वरीय स्मृति में रह उस परमात्मा का धन्यवाद भी किया।

केरेडारी सीओ बिपिन चंद्र विश्वास ने झांकी अवलोकन के पश्चात दिल को मोह लेने वाली कविता भी सुनाई जिसके बोल थे - "धीरे धीरे यहां का मौसम बदलने लगा है" एवं संस्थान के सदस्यों का ऐसे सुन्दर आयोजनों के लिए धन्यवाद भी ज्ञापित किया।

प्रखंड प्रमुख सुनीता देवी ने भी संस्थान की कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वास्तव में मां दुर्गा की चैतन्य झांकी मन को मोह लेने जैसा है। जब भी समय मिलता है मैं इनके संस्थान के कार्यक्रमों में जाती हूं , एक अलग  शांति की अनुभूति होती है। संस्थान हर पर्व को बड़े ही आध्यात्मिक तरीके और धूमधाम से मनाती है , इसके लिए पूरी टीम को धन्यवाद देती हूं।

ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी ने सभी अतिथियों को ओम शांति पट्टा से सम्मानित किया तत्पश्चात पूरी सभा को संबोधित करते हुए बताया कि भक्त लोग शक्तियों (दुर्गा, काली आदि) के हाथ में तलवार, खड़ग, तीर, कमान आदि-आदि अस्त्र-शस्त्र भी दिखाते हैं वास्तव में इसका आध्यात्मिक भावार्थ है कि, शक्तियों ने शस्त्रों से कोई हिंसक लड़ाई नहीं लड़ी थी बल्कि ईश्वरीय ज्ञान की तलवार, मधुर वाणी की कमान, सत्यता के तीर तथा योग व निश्चिन्त स्थिति की ढाल आदि द्वारा महाबलवान असुरों (पाँच विकारों - काम,क्रोध, लोभ ,मोह ,अहंकार) को खत्म किया था तथा अन्य लोगों को भी इन विकारों पर जीत पाने की प्रेरणा दी थी। अतः इन मनोविकारों को जीतने का पुरूषार्थ करना ही सच्चे अर्थों में 'नवरात्रि' मनाना है।

शुद्धि केवल नौ दिन ही क्यों?

मंच संचालन कर रहे ब्रह्माकुमार भीम भाई ने आज प्रश्न उठता है कि यदि मां दुर्गा को मन-वचन-कर्म की पवित्रता और ब्रह्मचर्य बहुत प्रिय है और यदि शुद्धि सचमुच अच्छी वस्तु है और सत्य ज्ञान से ही हमें स्थाई सुख और शान्ति मिल सकती है तो क्यों न हम इन्हें केवल नौ दिनों की बजाय सदैव ही धारण किए रखें ताकि हमसे कोई बुरे कार्य न हो? यह एक ध्यान देने योग्य बात है कि संसार में मनुष्य की महानता उसकी पवित्रता की शक्ति के अनुसार ही होती है। पवित्रता की शक्ति सत्य ज्ञान से ही प्राप्त होती है और सत्य ज्ञान तथा ईश्वरीय योग ही वह तेज तलवार है जो मानसिक विकारों को समूल नष्ट कर देती है।

नवरात्रों में रात भर जो दीपक जलाए जाते हैं, धूप-अगरबत्ती आदि सुलगाये जाते हैं, उनका भावार्थ भी यही है कि हम आत्मा का दीपक सदैव जला हुआ रखें ताकि विकार हमारे पास आ ही न सकें। हम दैवी गुणों की सुगंधित करके अपने व्यक्तित्व एवं वातावरण को सदैव खुशबूदार और आध्यात्मिक बनाये रखें। केवल नवरात्रि के नौ दिनों में ही घर को साफ़ और सुगन्धित रखने से सरस्वती या दुर्गा हम पर प्रसन्न नहीं होंगी, वास्तविक नवरात्रि मनाने के लिए परमपिता परमात्मा शिव द्वारा सिखाए जा रहे सहज ज्ञान और राजयोग द्वारा जीवन को पवित्र और शक्तिशाली बनाए।

इसके पश्चात डिवोशनल गीतों पर छोटे बच्चों के नृत्य और नशामुक्ति ड्रामा ने सभी के मन को एक नई मोड़ दी।

कार्यक्रम में सभी अतिथिगण,आयोजिका ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी सहित मंच संचालनकर्ता बीके भीम भाई, बीके रंजन भाई बीके पारस भाई,बीके अशोक भाई,बीके जागेश्वर भाई,बीके राजेंद्र भाई,बीके ईश्वर भाई,जयराम साव,विनोद कुमार,नारायण राम,प्रमोद कुमार,बीके रितु भाई,बीके धनीनाथ भाई,बीके अंजलि बहन,बीके पूनम बहन,बीके यशोदा,बीके खुशबू ,बीके संगीता,बीके कुंती,बीके दीपशिखा,बीके रेखा,बीके पूजा,बीके निशा सहित सैकड़ों बीके भाई बहने एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहें।

रिपोर्टर - सुनील ठाकुर 

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