जर्जर आंगनबाड़ी भवन बच्चों की जान पर भारी
विष्णुगढ़ : विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत चौथा गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र (कोड संख्या-53) बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। केंद्र का भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में है। छत की ढलाई कमजोर हो चुकी है और लोहे की छड़ें सड़ गई हैं, जिससे आए दिन प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहा है। ऐसे हालात में छोटे-छोटे बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी भवन की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बच्चों के बैठने की न तो समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की सुविधा। केंद्र में लगा चापाकल लंबे समय से खराब पड़ा है। मजबूरीवश आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका को दूसरे के घर में केंद्र संचालित करना पड़ रहा है। वहीं बच्चों के लिए भोजन तैयार करने हेतु दूर-दराज से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ता है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि जिस स्थान पर वर्तमान में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, वह भवन सीधे मुख्य सड़क से सटा हुआ है। इससे हर समय यह आशंका बनी रहती है कि बच्चे खेलते-दौड़ते हुए सड़क पर निकल जाएं। इस डर के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजने से कतराने लगे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से आंगनबाड़ी भवन की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इस दौरान प्रखंड स्तर का कोई भी पदाधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रखंड क्षेत्र के कई अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत भी इसी तरह जर्जर है, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के शिक्षा, पोषण और सर्वांगीण विकास की बुनियाद होते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण यही केंद्र आज बच्चों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?ग्रामीणों ने जिला एवं प्रखंड प्रशासन से मांग की है कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और जर्जर भवनों की मरम्मत अथवा नए भवनों का निर्माण शीघ्र सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा और पोषण मिल सके।
रिपोर्टर : संदीप मिश्रा


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