उपायुक्त के आदेश हवा में, चौपारण के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई बेहाल..

हजारीबाग : जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर लगातार बैठकों और सख़्त निर्देशों के बावजूद चौपारण प्रखंड के सरकारी विद्यालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।उपायुक्त के आदेश काग़ज़ों तक सीमित नज़र आ रहे हैं,जबकि स्कूलों में अव्यवस्था जस की तस है। प्रखंड के कई विद्यालयों में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते, जिससे नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो पातीं। कहीं स्कूल देर से खुलते हैं तो कहीं बच्चों को बिना पढ़ाई के ही घर भेज दिया जाता है। बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था अधिकांश विद्यालयों में या तो बंद पड़ी है या औपचारिकता बनकर रह गई है, जिससे शिक्षकों की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है।स्कूलों की भौतिक स्थिति भी बदहाल है। कई भवन जर्जर अवस्था में हैं, कक्षाओं में बैठने के लिए पर्याप्त बेंच डेस्क नहीं हैं और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। पीएम श्री विद्यालयों के नाम पर चयन तो हुआ, लेकिन ज़मीनी स्तर पर सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।मध्याह्न भोजन योजना में भी भारी लापरवाही देखी जा रही है। कई विद्यालयों में भोजन अनियमित है,गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं और बच्चों की उपस्थिति घटती जा रही है। बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच,आईएफए टैबलेट वितरण और पोषण से जुड़ी योजनाएं काग़ज़ों में पूरी बताई जा रही हैं,जबकि हकीकत कुछ और है।

निपुण भारत अभियान के तहत बुनियादी पढ़ाई को मजबूत करने की बात कही जा रही है, लेकिन कई विद्यालयों में बच्चे कक्षा के अनुरूप पढ़ने-लिखने में सक्षम नहीं हैं। स्कूल निरीक्षण, जय गुरुजी ऐप की जांच और शैक्षणिक मॉनिटरिंग भी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है।अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों की यह हालत रही तो वे मजबूरी में बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने को विवश होंगे। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन कब तक केवल निर्देश देता रहेगा और चौपारण के स्कूलों में वास्तविक सुधार कब होगा

रिपोर्टर : अमित सिंह

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