समीक्षा बैठकों की चमक, स्कूलों में बदहाली की स्याही—चौपारण में शिक्षा सुधार सिर्फ फाइलों तक सीमित!

हजारीबाग : जिले में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे भले ही कागजों और समीक्षा बैठकों में मजबूत दिखते हों, लेकिन चौपारण प्रखंड के सरकारी विद्यालयों की जमीनी हकीकत इन दावों की खुलकर पोल खोल रही है। एक ओर जिला उपायुक्त महोदय लगातार शिक्षा सुधार को लेकर गंभीरता दिखाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूलों की वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। शिक्षा गुणवत्ता सुधार के नाम पर किए जा रहे निरीक्षण और मॉनिटरिंग अब महज दिखावा बनते नजर आ रहे हैं। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी राकेश कुमार सिंह द्वारा मीडिया में खबर आने के बाद कुछ चुनिंदा विद्यालयों का भ्रमण किया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह दौरा सिर्फ फोटो खिंचवाने और औपचारिकता निभाने तक सीमित रहा। अधिकांश विद्यालयों की बदहाल स्थिति आज भी जस की तस है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब इस मामले में बीईईओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्क्रमित मध्य विद्यालय बेढना बारा इसकी जीती-जागती मिसाल है। जिस विद्यालय का निरीक्षण कर तस्वीरें मीडिया में जारी की गईं, उसी के बगल में स्थित शौचालय की हालत बेहद दयनीय है। गंदगी और दुर्गंध से भरे शौचालय न सिर्फ स्वच्छ भारत अभियान के दावों का मजाक उड़ा रहे हैं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बने हुए हैं। अभिभावकों का कहना है कि लगातार गंदगी के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन न विद्यालय प्रबंधन और न ही शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान दे रहा है। मध्याह्न भोजन योजना भी सवालों के घेरे में है। कागजों में गुणवत्तापूर्ण भोजन का दावा किया जाता है, जबकि हकीकत में यह योजना सिर्फ खाना पूर्ति बनकर रह गई है। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी लगभग नदारद है, जो सीधे तौर पर मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सबसे हैरानी की बात यह है कि बायोमैट्रिक उपस्थिति, विशेष शैक्षणिक गतिविधियों और नियमित निरीक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन न तो शिक्षा का स्तर सुधर रहा है और न ही बुनियादी सुविधाएं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह मॉनिटरिंग किसके लिए और किस उद्देश्य से की जा रही है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने पूरे मामले की जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि शिक्षा व्यवस्था की असल सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो चौपारण के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

रिपोर्टर : अमित सिंह

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.