पोलियो अभियान से पहले स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल

पोलियो अभियान से पहले स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, बैठक में नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकार

डेढ़ घंटे तक इंतजार करते रहे जनप्रतिनिधि,खाली कुर्सियों ने चौपारण अस्पताल की कार्यशैली पर खड़े किए बड़े सवाल

 

चौपारण- देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए जहां सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर लगातार अभियान चला रही है, वहीं चौपारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इस अभियान की तैयारियों को लेकर बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक में जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने ला दी।आगामी 28 जून से शुरू होने वाले पल्स पोलियो अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को प्रखंड स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में चिकित्सा प्रभारी, बीडीओ, सीडीपीओ,बीईईओ, जनप्रतिनिधियों तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मियों को शामिल होना था। लेकिन निर्धारित समय पर बैठक शुरू ही नहीं हो सकी।सभागार में कुछ एएनएम और आंगनबाड़ी कर्मी मौजूद रहीं, जबकि जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी नदारद रहे।सांसद प्रतिनिधि मुकुंद साव,रामस्वरूप पासवान तथा विधायक प्रतिनिधि राजदेव यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारियों का इंतजार करते रहे। लेकिन जब कोई जिम्मेदार पदाधिकारी नहीं पहुंचा तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जब बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए आयोजित बैठक को ही अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, तो आम लोगों की समस्याओं के प्रति विभाग की संवेदनशीलता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। उनका कहना था कि चौपारण सामुदायिक अस्पताल में लगातार लापरवाही और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन सुधार के बजाय स्थिति और चिंताजनक होती जा रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में जवाबदेही का अभाव है और कई कार्य केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित होकर रह गए हैं। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो अस्पताल की व्यवस्था और बदहाल हो सकती है, जिसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ेगा।बैठक में खाली पड़ी कुर्सियां और अधिकारियों की गैरमौजूदगी केवल एक बैठक की विफलता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में बढ़ती उदासीनता की कहानी बयां कर रही थीं। अब सवाल यह है कि आखिर जनता की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से कब तक मुंह मोड़ते रहेंगे?

 

संवाददाता - मुकेश सिंह चौपारण 

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