दनुआ घाटी फिर बनी 'मौत की घाटी', भीषण टक्कर में ट्रेलर चालक आधे घंटे तक केबिन में फंसा.
हजारीबाग : दनुआ घाटी में बुधवार को एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। हथिया बाबा के समीप एक ट्रिप ट्रेलर अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ा। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रिप ट्रेलर का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया। घायल चालक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन मौके पर एनएचएआई की क्रेन उपलब्ध नहीं होने से राहत कार्य में करीब आधे घंटे की देरी हो गई,सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और पुलिस ने दूसरे भारी वाहन की मदद से क्षतिग्रस्त ट्रेलर को खींचकर चालक को बाहर निकाला। घायल चालक की पहचान आनंद कुमार (22), पिता उमेश पंडित, निवासी पटना (बिहार) के रूप में हुई है। उसे 1033 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चौपारण पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यदि चालक को समय पर बाहर नहीं निकाला जाता तो उसकी जान पर बन सकती थी। लोगों का आरोप है कि दनुआ घाटी में आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन एनएचएआई की आपातकालीन व्यवस्था अक्सर नाकाफी साबित होती है। दुर्घटना के बाद क्रेन समय पर नहीं पहुंचने से लोगों में भारी नाराजगी देखी गई।स्थानीय लोगों का कहना है कि "दनुआ घाटी में हादसे अब सामान्य बात बन गए हैं। हर दुर्घटना के बाद राहत कार्य में देरी होती है।
इधर, लगातार हो रहे हादसों को लेकर क्षेत्र में चिंता गहराती जा रही है। मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने भी दनुआ घाटी की बदहाल आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, "दनुआ घाटी में लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर की स्थापना अब समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इस संबंध में मैंने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से बात की है और जल्द ही उनसे मिलकर चौपारण सामुदायिक अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर स्थापित कराने की मांग करूंगा।" लगातार हो रहे हादसों ने एक बार फिर प्रशासन और एनएचएआई की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्टर : मुकेश सिंह
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