दनुआ घाटी में फिर सड़क हादसा, कब रुकेगा मौत का सिलसिला?
चौपारण (हजारीबाग)- चौपारण की दनुआ घाटी में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। घाटी में लगातार हो रहे दुर्घटनाओं के कारण यह इलाका लोगों के बीच ‘मौत की घाटी’ के रूप में पहचान बना चुका है। आए दिन होने वाले हादसों से स्थानीय लोग और वाहन चालक दहशत में हैं।
दनुआ घाटी में एक बार फिर सड़क हादसे की घटना सामने आई है। हादसे के बाद एक बार फिर वही सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस मौत की घाटी से लोगों को सुरक्षित कैसे निकाला जाए। वर्षों से दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी है, लेकिन अब तक कोई ऐसा स्थायी और प्रभावी समाधान सामने नहीं आया है, जिससे हादसों पर पूरी तरह लगाम लग सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्घटनाओं के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और जांच की बातें तो होती हैं, लेकिन स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल दिखाई नहीं देती। कभी सड़क की स्थिति, कभी तेज रफ्तार, कभी भारी वाहनों की आवाजाही तो कभी घाटी की भौगोलिक स्थिति हादसों की वजह बनती है।
दनुआ घाटी की समस्या अब केवल एक सड़क हादसे का मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा का गंभीर सवाल बन चुकी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विशेषज्ञों की टीम से घाटी का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएं।
लोगों का सवाल साफ है—आखिर कब तक दनुआ घाटी में हादसे होते रहेंगे और कब तक लोगों की जान जाती रहेगी? प्रशासन, सड़क निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों को मिलकर ऐसा ठोस समाधान तलाशना होगा, जिससे इस ‘मौत की घाटी’ का नाम हमेशा के लिए सुरक्षित सड़क के रूप में बदला जा सके।
संवाददाता - अमित सिंह
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