लड्डू में प्रतिबंधित रंग मिला,कार्रवाई के बाद उठे कई सवाल..
हजारीबाग : चौपारण में खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने चौपारण और बरही प्रखंड में जांच अभियान चलाकर बेसन के लड्डू और गुपचुप में प्रतिबंधित मेटानिल येलो रंग के इस्तेमाल का मामला पकड़ा। संबंधित खाद्य पदार्थों को मौके पर नष्ट कराया गया और दुकानदारों को प्रतिबंधित रंग का इस्तेमाल नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई। विभाग की इस कार्रवाई से मिलावट करने वालों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन कार्रवाई के साथ ही कई ऐसे सवाल भी सामने आए हैं, जिनका जवाब अब विभाग से लोग जानना चाहते हैं।सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मिलावट के खिलाफ यह अभियान सिर्फ एक दिन की कार्रवाई बनकर रह जाएगा या चौपारण और बरही में लगातार औचक जांच होती रहेगी, स्थानीय लोगों का कहना है कि एक-दो दुकानों पर कार्रवाई करने से खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या खत्म नहीं होने वाली। यदि विभाग वास्तव में मिलावट के खिलाफ गंभीर है तो छोटे ठेले से लेकर बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों तक सभी की नियमित और समान रूप से जांच होनी चाहिए।
चौपारण के खिरमोहन मिठाई दुकान में जांच के दौरान बेसन के लड्डू में मेटानिल येलो रंग के इस्तेमाल की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित लड्डू को मौके पर ही नष्ट कराया गया। चतरा रोड स्थित करीब दो गुपचुप ठेलों की जांच में भी मेटानिल येलो रंग के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात सामने आई। संबंधित खाद्य पदार्थों को नष्ट कराया गया। टीम ने संचालकों को प्रतिबंधित रंग का इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी।बरही के रसोइया धमना स्थित विंध्यवासिनी ढाबा का निरीक्षण कर साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने का निर्देश दिया गया। गया रोड स्थित पटेल पान दुकान की भी जांच की गई। विभाग ने कहा है कि जिन खाद्य प्रतिष्ठानों में एफएसएसएआई का वैध लाइसेंस या पंजीकरण नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन कार्रवाई के बाद कुछ दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने जांच के तौर-तरीके पर सवाल उठाए हैं। दुकानदारों का आरोप है कि जांच के दौरान गरीब और छोटे दुकानदारों को ही अधिक निशाना बनाया गया, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों में जांच सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रही। लोगों का कहना है कि कई जगहों पर कुछ दुकानों की जांच की गई, जबकि आसपास की अन्य दुकानों को छोड़ दिया गया। इससे लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खाद्य सुरक्षा सभी के लिए समान है तो जांच भी सभी के लिए समान होनी चाहिए। किसी दुकान का आकार या कारोबारी की आर्थिक स्थिति जांच का आधार नहीं होनी चाहिए। लोगों की मांग है कि विभाग अपनी कार्रवाई में पारदर्शिता लाए और छोटे-बड़े सभी खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करे।लड्डू में प्रतिबंधित रंग मिलने के बाद लोगों ने एक और गंभीर सवाल उठाया है। जिस खाद्य पदार्थ को इंसान के खाने के लिए सुरक्षित नहीं माना गया, उसे नष्ट करने के बाद यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह किसी जानवर के खाने में न पहुंचे। लोगों का कहना है कि खाने की चीज अगर इंसान के लिए नुकसानदेह है तो जानवरों के लिए भी उसे खुले में छोड़ना चिंता का विषय हो सकता है। लोगों ने ऐसे खाद्य पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।स्थानीय लोगों ने बाहर से चौपारण में आने वाली मिठाइयों की सप्लाई की भी जांच कराने की मांग की है। लोगों का दावा है कि गोमिया, डुमरी और बाराचट्टी क्षेत्र से वाहनों के जरिए एक-दो दिन के अंतराल पर बड़ी मात्रा में मिठाइयों की सप्लाई की जाती है। लोगों का कहना है कि यदि दुकानों पर मिलावटी मिठाई पहुंच रही है तो यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि मिठाई तैयार कहां हो रही है और सप्लाई कौन कर रहा है।
कुछ लोगों ने मिठाई सप्लायरों द्वारा एफएसएसएआई प्रमाणपत्र के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इस आरोप की विभागीय पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल खुदरा दुकानों पर कार्रवाई करने के बजाय मिठाई बनाने वाले स्रोत और सप्लायरों की भी जांच की जानी चाहिए। यदि सप्लाई के स्तर पर ही गुणवत्ता से समझौता हो रहा है तो दुकानदारों पर कार्रवाई से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा।
लोगों का कहना है कि त्योहारों, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़े पैमाने पर मिठाइयां बाजार में आती हैं। इसलिए विभाग को सिर्फ अभियान चलाकर फोटो खिंचवाने तक सीमित रहने के बजाय लगातार नमूने लेने, जांच कराने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने की व्यवस्था करनी चाहिए।जांच अभियान उपायुक्त हजारीबाग हेमंत सती और अभिहित अधिकारी सह अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शशि जायसवाल के निर्देश पर चलाया गया। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्वेता त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की। निरीक्षण दल में डॉ. नावेद अंजुम, अम्ब्रीश पांडे, विकास शर्मा एवं धनेश्वर कुशवाहा शामिल थे।
विभाग की ओर से लोगों से खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, स्वच्छता और एफएसएसएआई लाइसेंस या पंजीकरण की जांच करने की अपील की गई है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विभाग आगे क्या करता है। क्या चौपारण में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच होगी? क्या बड़े प्रतिष्ठानों और बाहर से मिठाई लाने वाले सप्लायरों तक जांच पहुंचेगी? और क्या हर दुकानदार के लिए एक समान मापदंड लागू होगा,मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन असली असर तभी दिखेगा जब छापेमारी एक दिन की खबर नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली व्यवस्था बने।
रिपोर्टर : मुकेश सिंह

No Previous Comments found.