बच्चों के सिर में जूं को न करें इग्नोर: सिर्फ खुजली ही नहीं, बन सकती है गंभीर बैक्टीरियल अटैक की वजह!

अक्सर सिर में जूं (Head Lice) दिखते ही लोग इसे एक सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर सिर्फ कंघी फेरकर भूल जाते हैं। खासकर छोटे बच्चों के मामले में इसे केवल मामूली खुजली का कारण समझा जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय इससे काफी अलग है। सिर में लंबे समय तक इन परजीवियों का बना रहना स्कैल्प को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ कई तरह से शारीरिक सेहत को भी बिगाड़ सकता है।

सिर में कैसे डेरा जमाती हैं जुएं?

जूं बेहद सूक्ष्म परजीवी कीड़े होते हैं, जो इंसानी खोपड़ी की त्वचा को अपना ठिकाना बनाकर खून से पोषण प्राप्त करते हैं। ये उड़ या कूद नहीं सकते, बल्कि एक सिर से दूसरे सिर में सीधे शारीरिक संपर्क के जरिए पहुंचते हैं। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति संक्रमित इंसान की कंघी, टोपी, तौलिया, तकिया या क्लिप इस्तेमाल करता है, तो ये आसानी से दूसरे के बालों में ट्रांसफर हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे खेल-कूद के दौरान आपस में ज्यादा करीब रहते हैं, इसलिए वे इस समस्या की चपेट में सबसे जल्दी आते हैं।

स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव

असहनीय खुजली और घाव होना: जूं जब खून चूसती हैं, तो उनके लार के संपर्क में आने से त्वचा में तेज एलर्जिक रिएक्शन होता है। इससे सिर में लगातार और तेज खुजली उठती है। कई बार खुजली इतनी severe होती है कि नाखून लगने से स्कैल्प की त्वचा छिल जाती है और सिर पर छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं।

बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा: लगातार खुजलाने से जब त्वचा की ऊपरी परत छिल जाती है, तो बाहरी बैक्टीरिया को अंदर घुसने का रास्ता मिल जाता है। इसकी वजह से सिर की त्वचा में सूजन, तेज रेडनेस, घावों में मवाद (पस) भरने और स्किन इंफेक्शन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में मरीजों को डॉक्टर से एंटीबायोटिक इलाज तक लेना पड़ता है।

बचाव और सही कदम

सिर में जूं के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टरी परामर्श से मेडिकेटेड शैम्पू या ऑयल का उपयोग करें। बच्चों को अपनी पर्सनल चीजें जैसे कंघी, तौलिया और हेयर एक्सेसरीज दूसरों के साथ शेयर न करने की हिदायत दें, ताकि इस समस्या को समय रहते रोका जा सके।

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