हार्ट अटैक: पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कम क्यों होता है जोखिम
BY UJJWAL SINGH
हार्ट अटैक आज के समय की सबसे खतरनाक और आम बीमारियों में से एक बन चुका है. यह तब होता है जब दिल तक जाने वाला रक्त प्रवाह रुक जाता है, आमतौर पर कोरोनरी आर्टरीज में ब्लॉकेज के कारण. कोलेस्ट्रॉल, फैट और अन्य पदार्थ इन धमनी मार्गों में जमा हो जाते हैं, जिससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज होती है। यह स्थिति हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों की सबसे बड़ी वजह मानी जाती है .
हार्ट अटैक के मुख्य कारण...
हार्ट अटैक के पीछे कई जोखिम कारक होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. इनमें शामिल हैं:
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- बढ़ती उम्र
- डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- मोटापा
- जेनेटिक कारण
- तंबाकू और शराब का सेवन
- ज्यादा तनाव और मानसिक दबाव
- पहले से हार्ट से जुड़ी समस्याएं
महिलाओं में जोखिम कम क्यों होता है...
Dr. KM Cherian Institute Of Medical Sciences की रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा देर से बढ़ता है. पुरुषों में पहली बार हार्ट अटैक का औसत उम्र लगभग 65 साल होती है, जबकि महिलाओं में यह करीब 72 साल के आसपास देखा जाता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि मेनोपॉज से पहले महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन दिल की सुरक्षा में मदद करता है. इसके अलावा, पुरुषों में तंबाकू और शराब का सेवन अधिक होता है और तनाव को संभालने की क्षमता भी कम होती है, जिससे उनका जोखिम बढ़ जाता है.
बचाव के तरीके...
हार्ट अटैक से बचाव संभव है यदि समय रहते सावधानी बरती जाए.
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएं.
- ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें.
- हेल्दी डाइट अपनाएं, जिसमें फल और सब्जियां अधिक हों, और फैट, नमक व शुगर कम करें.
- नियमित व्यायाम और तनाव कम करने वाली गतिविधियां करें.
समय पर जागरूकता और सही लाइफस्टाइल अपनाकर हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम कियाजा सकता है .

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