Dehydration Risks: प्यास लगे तब पानी पीना खतरनाक, किडनी के लिए है नुकसानदेह

हममें से अधिकांश लोग पानी पीने को बहुत साधारण बात मानते हैं. प्यास लगे तो गिलास उठा लिया, नहीं लगे तो छोड़ दिया. लेकिन यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह आदत हमारी किडनी के लिए बेहद हानिकारक हो सकती है. किडनी शरीर से टॉक्सिन निकालती है, इलेक्ट्रोलाइट संतुलित रखती है और तरल पदार्थों का स्तर नियंत्रित करती है. पर्याप्त पानी न मिलने पर किडनी पर दबाव बढ़ता है और लंबे समय में पथरी, यूरिन इन्फेक्शन और क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है.

पानी को लेकर आम गलतफहमियां

कई लोग मानते हैं कि दिनभर चाय, कॉफी या जूस पी लेना पर्याप्त है. लेकिन कैफीन और शुगर वाले पेय शरीर से पानी तेजी से निकाल सकते हैं. एक और आम गलतफहमी यह है कि पानी सिर्फ प्यास लगने पर ही पीना चाहिए. विशेषज्ञ कहते हैं कि जब प्यास महसूस होती है, तब तक शरीर हल्का-सा डिहाइड्रेट हो चुका होता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ चुका होता है. दूसरी तरफ, जरूरत से ज्यादा पानी पी लेना भी खतरनाक हो सकता है। कुछ लोग सोचते हैं कि ज्यादा पानी पीना हमेशा फायदेमंद है, लेकिन तीन-चार लीटर या उससे अधिक पानी बहुत कम समय में पी लेने से खून में सोडियम का स्तर गिर सकता है, जिसे हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है. गंभीर मामलों में इससे दिमाग में सूजन, दौरे या कोमा जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है.

डॉक्टर क्या कहते हैं?

यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजय अग्रवाल के अनुसार, किडनी को संतुलित मात्रा में पानी की जरूरत होती है. लगातार कम पानी पीने से पेशाब गाढ़ा हो जाता है और पथरी या इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. वहीं डायबिटीज या हार्ट रोग से जूझ रहे लोगों में जरूरत से ज्यादा तरल लेने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

कितनी मात्रा में पानी पीना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है की  8 गिलास वाला नियम हर किसी पर लागू नहीं होता. महिलाओं को करीब 2.2 लीटर और पुरुषों को 3 लीटर तरल की आवश्यकता होती है, लेकिन यह मौसम, पसीना, व्यायाम और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है. पेशाब का रंग सही हाइड्रेशन का संकेत देता है. हल्का पीला रंग पर्याप्त पानी का संकेत है, गहरा रंग कमी और बिल्कुल साफ रंग अधिक पानी की निशानी है.

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