पीरियड्स आने से 10 दिन पहले लक्षण क्यों दिखने लगते हैं?
महिलाओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) शुरू होने से लगभग 7 से 10 दिन पहले शरीर और मन में कई बदलाव महसूस होने लगते हैं। इन्हें आमतौर पर PMS (Premenstrual Syndrome) यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि हार्मोनल बदलावों की वजह से होने वाली एक सामान्य स्थिति है।
PMS क्या होता है?
Premenstrual syndrome एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीरियड्स शुरू होने से पहले शरीर में हार्मोन बदलते हैं और इसके कारण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लक्षण दिखाई देते हैं।
पीरियड्स से 10 दिन पहले लक्षण क्यों शुरू होते हैं?इसका मुख्य कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव हैं:
1. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन में बदलाव-ओवुलेशन (अंडोत्सर्जन) के बाद शरीर में दो मुख्य हार्मोन बदलने लगते हैं:एस्ट्रोजन (Estrogen),प्रोजेस्टेरोन (Progesterone),इनका संतुलन बिगड़ने पर PMS के लक्षण शुरू हो जाते हैं।
2. ब्रेन के केमिकल्स पर असर
हार्मोन बदलाव से मस्तिष्क के "सेरोटोनिन" नामक केमिकल पर असर पड़ता है।मूड खराब होना,चिड़चिड़ापन,उदासी ये सब इसी वजह से होते हैं।
3. शरीर में पानी रुकना (Water Retention)
हार्मोन बदलाव के कारण:पेट फूलना.स्तनों में दर्द, वजन हल्का बढ़ सकते हैं।
4. तनाव और जीवनशैली का असर
अगर पहले से तनाव, नींद की कमी या अनहेल्दी डाइट हो तो PMS के लक्षण और बढ़ सकते हैं।
आम लक्षण कौन-कौन से होते हैं?
- शारीरिक लक्षण:पेट दर्द या ऐंठन,सिरदर्द,थकान,स्तनों में दर्द,भूख ज्यादा लगना आम लक्षण होते हैं।
- मानसिक लक्षण:चिड़चिड़ापन,गुस्सा जल्दी आना,उदासी या anxiety, ध्यान न लगना।
हर महिला में क्यों अलग होता है असर?
हर शरीर का हार्मोन बैलेंस अलग होता है। इसलिए: किसी को हल्के लक्षण होते हैं, किसी को बहुत ज्यादा परेशानी होती है।
क्या यह सामान्य है?
हाँ, PMS पूरी तरह सामान्य है। लेकिन अगर लक्षण बहुत ज्यादा हों और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करें, तो यह Premenstrual Dysphoric Disorder (PMDD) का संकेत हो सकता है, जिसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है।राहत के उपाय: हल्का व्यायाम (walk, yoga),पर्याप्त नींद,पानी ज्यादा पीना, कैफीन और जंक फूड कम करना, तनाव कम करने की कोशिश करना।
पीरियड्स से लगभग 10 दिन पहले लक्षण दिखना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, जो हार्मोनल बदलावों के कारण होती है। सही जीवनशैली अपनाकर इन लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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