युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक का सच , जानी-मानी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सौम्या गुप्ता से जानिए ...
क्या आपने कभी सोचा है कि जो हार्ट अटैक कभी सिर्फ़ बुज़ुर्गों की बीमारी माना जाता था, वही आज 20 से 30 साल के युवाओं तक क्यों पहुँच गया है?जिम जाने वाले, स्टार्टअप चलाने वाले, कॉलेज स्टूडेंट्स… बाहर से पूरी तरह फिट दिखने वाले युवा आखिर अचानक हार्ट अटैक का शिकार क्यों हो रहे हैं?क्या इसकी वजह है हमारी भागदौड़ भरी ज़िंदगी, बढ़ता तनाव, बिगड़ती नींद, जंक फूड और मोबाइल की लत?इन्हीं तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए हमने की बात जानी-मानी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सौम्या गुप्ता से .. डॉ. सौम्या ने हमें बताया कि युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक का असली कारण क्या है, कौन लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं और आखिर हम अपने दिल को लंबे समय तक स्वस्थ कैसे रख सकते हैं।

क्या हार्ट अटैक अचानक होता है या शरीर पहले से कोई संकेत देता है?
डॉ. सौम्या के मुताबिक अधिकांश मामलों में हार्ट अटैक अचानक नहीं होता। हमारा शरीर पहले कई चेतावनी संकेत देता है, लेकिन लोग उन्हें गैस, थकान या सामान्य दर्द समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।सीने में दबाव या भारीपन, सांस फूलना, बाएं हाथ, कंधे या जबड़े में दर्द, बिना वजह पसीना आना या अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस होना—ये सभी संकेत हो सकते हैं।अगर ऐसे लक्षण बार-बार महसूस हों तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज से जान भी बच सकती है और दिल को होने वाला नुकसान भी कम किया जा सकता है।

आज युवाओं में इसके मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
डॉ. सौम्या ने बताया कि आज हमारी लाइफस्टाइल पूरी तरह बदल चुकी है। तनाव पहले से कहीं ज्यादा है, फास्ट फूड हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है, लोग देर रात तक जागते हैं, शारीरिक गतिविधि कम हो गई है और धूम्रपान या वेपिंग जैसी आदतें भी बढ़ी हैं।इसके अलावा कुछ लोगों में आनुवंशिक कारण भी होते हैं। इसलिए अब सिर्फ उम्र देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी को हार्ट अटैक नहीं आएगा।
क्या जिम जाने वाले लोगों को भी हार्ट अटैक आ सकता है?
डॉ. सौम्या ने साफ तौर पर कहा कि बिल्कुल आ सकता है,जिम जाना अच्छी बात है लेकिन सिर्फ मसल्स बनाना और दिल का स्वस्थ होना दोनों अलग बातें हैं।
अगर किसी को हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ या कोई जन्मजात हृदय रोग है तो वह बाहर से फिट दिखने के बावजूद जोखिम में हो सकता है।
इसलिए Exercise के साथ-साथ Regular Health Check-up भी उतना ही जरूरी है।
दिल के लिए ज्यादा खतरनाक क्या है—ज्यादा सोचना या बिल्कुल ना सोना?
डॉ. सौम्या का इस विषय में कहना है कि दोनों ही नुकसानदायक हैं।लगातार तनाव शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ाता है जो दिल पर दबाव डालते हैं।
वहीं नींद की कमी से ब्लड प्रेशर, मोटापा और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ सकता है।स्वस्थ दिल के लिए रोज़ 7 से 9 घंटे की अच्छी नींद बहुत जरूरी है।
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क्या Fit Body हमेशा Healthy Heart की निशानी होती है?
डॉ. सौम्या के मुताबिक ऐसा बिल्कुल नहीं है ..कई लोग बाहर से बिल्कुल फिट दिखते हैं लेकिन उनका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा होता है, ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है या दिल की कोई छिपी हुई बीमारी होती है।इसलिए सिर्फ शरीर देखकर दिल की सेहत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
क्या Love Life Stress भी दिल पर असर डाल सकता है?
डॉ. सौम्या ने इस रोचक सवाल के जवाब में साफ कहा कि जी हाँ।भावनात्मक तनाव भी शरीर पर असर डालता है।जब हम तनाव में होते हैं तो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर यह हृदय के लिए नुकसानदायक हो सकता है।इसलिए Mental Health और Heart Health एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
तो दोस्तों, एक बात बिल्कुल साफ़ हो जाती है—दिल का ख्याल कल नहीं… आज से रखना होगा।हार्ट अटैक अक्सर अचानक दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे हमारी रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतों का सालों का असर छिपा होता है।तनाव, खराब नींद, अनियमित खान-पान, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और लापरवाह लाइफस्टाइल—ये सभी मिलकर धीरे-धीरे हमारे दिल को नुकसान पहुंचाते हैं।अगर आप चाहते हैं कि आपका दिल लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ रहे, तो आज से ही अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे लेकिन लगातार बदलाव शुरू कीजिए।
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