18 घंटे काम और चेहरे पर Zero थकान! जानिए PM मोदी का वो सीक्रेट रूटीन जो भगाता है सारा तनाव

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव लगभग हर किसी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस, परिवार और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच दिमाग को आराम देना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में तनाव को मैनेज करने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिनचर्या को देखें तो उसमें योग, ध्यान, प्राणायाम और नियमित जीवनशैली को खास जगह मिलती है। सार्वजनिक मंचों पर भी वह कई बार योग और ध्यान के महत्व का उल्लेख कर चुके हैं। हालांकि किसी भी व्यक्ति का रूटीन दूसरे व्यक्ति के लिए बिल्कुल उसी तरह काम करे, यह जरूरी नहीं है। फिर भी उनकी बताई और सार्वजनिक रूप से सामने आई आदतों से तनाव प्रबंधन के कुछ सामान्य तरीके सीखे जा सकते हैं।
 
सुबह की शुरुआत दिमाग को शांत रखने से
 
दिन की शुरुआत किस तरह होती है, इसका असर पूरे दिन के मूड और काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है। सुबह उठते ही फोन, मैसेज और सोशल मीडिया में उलझने के बजाय कुछ मिनट खुद के साथ बिताना एक आसान बदलाव हो सकता है।
 
ध्यान इसी दिशा में मदद करता है। कुछ देर शांत बैठकर सांसों और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने से व्यक्ति अपने विचारों को व्यवस्थित करने की कोशिश कर सकता है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता और मानसिक शांति में मदद मिल सकती है।इसके लिए शुरुआत में लंबे समय तक बैठना जरूरी नहीं है। 5 से 10 मिनट से शुरुआत करके धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है।
 
सांसों को नियंत्रित करना क्यों उपयोगी हो सकता है?
 
तनाव की स्थिति में अक्सर सांस लेने की गति बदल जाती है। व्यक्ति तेजी से सांस लेने लगता है और शरीर में बेचैनी महसूस हो सकती है। ऐसे समय में धीमी और नियंत्रित सांस लेने का अभ्यास रिलैक्स महसूस करने में मदद कर सकता है।प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को अलग-अलग तकनीकों के जरिए नियंत्रित किया जाता है। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे अभ्यास योग परंपरा में लंबे समय से किए जाते रहे हैं।अगर ऑफिस में किसी मीटिंग या काम के दबाव के दौरान तनाव महसूस हो रहा है, तो कुछ क्षण रुककर सामान्य गति से गहरी सांस लेना भी एक छोटा ब्रेक बन सकता है।
 
ध्यान देने वाली बात यह है कि सांस रोकने या किसी कठिन प्राणायाम को बिना सही जानकारी के नहीं करना चाहिए। शुरुआती लोगों के लिए सरल और सहज श्वास अभ्यास बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
 
योग सिर्फ फिटनेस तक सीमित नहीं
 
योग को अक्सर वजन कम करने, लचीलापन बढ़ाने या शारीरिक फिटनेस से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन योग अभ्यास में शरीर के साथ-साथ सांस और मानसिक स्थिति पर भी ध्यान दिया जाता है।
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वालों के लिए हल्की स्ट्रेचिंग और आसान योगासन शरीर की जकड़न कम करने में मदद कर सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि का फायदा मूड और सामान्य स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से योग को सार्वजनिक रूप से बढ़ावा देते रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे अवसरों पर भी योग के महत्व की बात करते हैं।
 
Cyclic Meditation क्या है?
 
योग से जुड़ी कुछ ध्यान तकनीकों में शरीर को हल्का सक्रिय करने के बाद विश्राम और ध्यान की अवस्था में जाने का तरीका इस्तेमाल किया जाता है। Cyclic Meditation भी ऐसी ही एक तकनीक है, जिसमें योगिक गतिविधियों और रिलैक्सेशन को क्रम से किया जाता है।इसका उद्देश्य शरीर और दिमाग को एक साथ रिलैक्स करने पर ध्यान देना है। मीडिया में प्रधानमंत्री मोदी के योग अभ्यास के संदर्भ में इस तकनीक का भी उल्लेख हुआ है।हालांकि किसी विशेष ध्यान पद्धति को अपनाने से पहले उसके सही तरीके को समझना जरूरी है। पहली बार करने वाले व्यक्ति किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक से तकनीक सीख सकते हैं।
 
असली फर्क डालता है अनुशासन
 
तनाव कम करने के लिए सिर्फ एक दिन योग या ध्यान करना पर्याप्त नहीं होता। किसी भी स्वस्थ आदत का असर उसके नियमित अभ्यास से जुड़ा होता है।प्रधानमंत्री मोदी की सार्वजनिक छवि में नियमित दिनचर्या और अनुशासन एक प्रमुख पहलू रहा है। आम व्यक्ति इससे यह सीख सकता है कि अपनी दिनचर्या में कुछ चीजों के लिए निश्चित समय तय करना उपयोगी हो सकता है।
 
उदाहरण के लिए:
 
  • सुबह उठने और रात में सोने का समय लगभग तय रखना।
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  • रोज कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना।
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  • काम के दौरान छोटे ब्रेक लेना।
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  • भोजन का समय अनियमित न होने देना।
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  • सोने से पहले लगातार मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने से बचना।
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  • दिन के जरूरी कामों की पहले से योजना बनाना।
 
तनाव आने पर तुरंत क्या करें?
 
तनाव हमेशा बड़ी समस्या के रूप में सामने नहीं आता। कई बार छोटी-छोटी चीजें मिलकर मानसिक दबाव बढ़ा देती हैं। ऐसे समय में कुछ मिनट का ब्रेक मददगार हो सकता है।अपनी सीट से उठकर थोड़ा चलना, कुछ धीमी सांसें लेना, पानी पीना या कुछ देर आंखें बंद करके शांत बैठना एक छोटा रीसेट बन सकता है।अगर किसी काम को लेकर बहुत ज्यादा दबाव महसूस हो रहा है तो पूरी समस्या के बारे में एक साथ सोचने के बजाय उसे छोटे हिस्सों में बांटना भी उपयोगी रणनीति हो सकती है।
 
क्या आम आदमी PM Modi की दिनचर्या अपना सकता है?
 
पूरी दिनचर्या की नकल करने की जरूरत नहीं है। हर व्यक्ति का काम, शरीर, नींद और जिम्मेदारियां अलग होती हैं। बेहतर तरीका यह है कि उपयोगी आदतों को अपनी जिंदगी के हिसाब से अपनाया जाए।आप चाहें तो शुरुआत सिर्फ 15 मिनट से कर सकते हैं। सुबह 5 मिनट शांत बैठना, 5 मिनट सरल श्वास अभ्यास और 5 मिनट हल्की स्ट्रेचिंग जैसी छोटी शुरुआत भी नियमितता बनाने में मदद कर सकती है।समय मिलने पर इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
 
तनाव को नजरअंदाज करना सही नहीं
 
योग, ध्यान, व्यायाम और बेहतर दिनचर्या तनाव को संभालने के उपयोगी तरीके हो सकते हैं, लेकिन हर मानसिक परेशानी का समाधान केवल इन्हीं में नहीं है।अगर लगातार चिंता, घबराहट, नींद की समस्या, उदासी या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने जैसी परेशानी बनी हुई है, तो योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
 
निष्कर्ष
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योग और ध्यान से जुड़ी सार्वजनिक रूप से बताई गई आदतों से सबसे बड़ी सीख किसी खास एक्सरसाइज की नहीं, बल्कि नियमितता की ली जा सकती है। व्यस्त जीवन में भी अगर व्यक्ति अपने लिए कुछ मिनट निकालकर सांस, शरीर और मन पर ध्यान दे, तो तनाव को संभालने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।तनाव को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उससे निपटने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। शुरुआत छोटी रखें और ऐसी आदत चुनें जिसे लंबे समय तक निभाना आपके लिए व्यावहारिक हो।

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