Air Pollution: जहरीली हवा और बदलता मौसम बिगाड़ सकते हैं सांस के मरीजों की हालत, अस्थमा-COPD वाले ऐसे रखें सेहत का ख्याल
देश के कई इलाकों में वायु प्रदूषण और मौसम में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। खासकर फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए यह समय अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हवा में मौजूद प्रदूषक कण, धूल, धुआं और तापमान में बदलाव सांस की नलियों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
ऐसे में सिर्फ प्रदूषण से बचना ही नहीं, बल्कि दवाओं को नियमित रूप से लेना और स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों पर नजर रखना भी जरूरी है। आइए जानते हैं कि खराब एयर क्वालिटी के दौरान सांस के मरीज अपनी सुरक्षा के लिए क्या कर सकते हैं।
खराब हवा फेफड़ों के लिए कैसे बनती है परेशानी?
प्रदूषित हवा में मौजूद बेहद छोटे कण सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये कण श्वसन तंत्र में सूजन और जलन बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के फेफड़े पहले से कमजोर हैं, उन्हें इसका असर अधिक महसूस हो सकता है।
अस्थमा के मरीजों में प्रदूषण के संपर्क से खांसी, घरघराहट और सांस लेने में दिक्कत बढ़ सकती है। वहीं, COPD से पीड़ित लोगों को सांस फूलने और बलगम बढ़ने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
मौसम में ठंडक आने या तापमान अचानक बदलने पर भी कुछ लोगों के लक्षण बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और प्रदूषण के स्तर पर निर्भर करता है।
अस्थमा और COPD के मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां
1. घर से निकलने से पहले AQI की जानकारी लें
बाहर की हवा कितनी प्रदूषित है, इसका अंदाजा एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI से लगाया जा सकता है। अगर आपके इलाके में प्रदूषण का स्तर अधिक है, तो बाहर लंबे समय तक रहने और खुले स्थानों पर कठिन व्यायाम करने से बचें।
सुबह की सैर या अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए ऐसा समय और स्थान चुनें, जहां प्रदूषण अपेक्षाकृत कम हो। केवल समय देखकर हवा को साफ न मानें, बल्कि स्थानीय AQI की जानकारी भी देखें।
2. प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल करें
खराब एयर क्वालिटी में बाहर निकलना जरूरी हो, तो सही आकार का N95 मास्क बारीक कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है। मास्क को नाक और मुंह पर अच्छी तरह फिट होना चाहिए।
हालांकि, मास्क प्रदूषण से पूरी सुरक्षा नहीं देता। इसलिए इसके साथ बाहर बिताया जाने वाला समय कम करना और ज्यादा प्रदूषित जगहों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
3. घर के भीतर धुएं को जमा न होने दें
कई बार लोग बाहर के प्रदूषण से बचने के लिए घर में रहते हैं, लेकिन कमरे के अंदर का धुआं भी सांस की परेशानी बढ़ा सकता है। खाना पकाने से निकलने वाला धुआं, तंबाकू और अन्य जलने वाली चीजों से पैदा होने वाले कण घर की हवा को प्रभावित कर सकते हैं।
खाना बनाते समय उचित एग्जॉस्ट या वेंटिलेशन की व्यवस्था रखें। एयर प्यूरीफायर उपलब्ध हो, तो उसे निर्माता के निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। बाहर की हवा अधिक प्रदूषित होने पर खिड़कियां बंद रखना मददगार हो सकता है, लेकिन घर के अंदर हवा की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी जरूरी है।
4. इनहेलर और दवाओं में लापरवाही न करें
अस्थमा और COPD के मरीजों को डॉक्टर की ओर से निर्धारित उपचार जारी रखना चाहिए। अगर इनहेलर इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी सही तकनीक जानना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से इनहेलर इस्तेमाल करने का तरीका दोबारा समझ सकते हैं।
लक्षण बढ़ने पर अपनी मर्जी से दवाओं की मात्रा न बढ़ाएं और न ही निर्धारित दवाएं बंद करें। यदि सामान्य से ज्यादा सांस फूल रही हो या दवाओं से राहत न मिल रही हो, तो चिकित्सकीय सलाह लें।
5. धूल, धुएं और तेज गंध वाले स्थानों से बचें
ट्रैफिक का धुआं, निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल और कुछ सफाई उत्पादों की तेज गंध संवेदनशील लोगों में परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे स्थानों पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचें।
घर की सफाई करते समय धूल उड़ने से रोकने की कोशिश करें। यदि किसी खास गंध या पदार्थ के संपर्क में आने पर बार-बार खांसी या घरघराहट होती है, तो उस ट्रिगर से दूरी बनाएं और डॉक्टर को इसकी जानकारी दें।
सांस की बीमारी में खानपान और दिनचर्या कैसी हो?
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या महत्वपूर्ण हैं। शरीर में पानी की कमी न होने दें और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार गतिविधियां जारी रखें।
यदि बाहर प्रदूषण अधिक है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार घर के अंदर हल्की कसरत की जा सकती है। ठंडी हवा से परेशानी होती हो, तो बाहर निकलते समय नाक और मुंह को ढकना मददगार हो सकता है।
यह भी ध्यान रखें कि कोई विशेष भोजन, घरेलू नुस्खा या भाप लेना प्रदूषण से होने वाले नुकसान को पूरी तरह रोकने का प्रमाणित विकल्प नहीं है। सबसे जरूरी है प्रदूषण के संपर्क को कम करना और बीमारी का उचित इलाज जारी रखना।
इन संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
अगर खांसी लगातार बढ़ रही है, सीने में जकड़न महसूस हो रही है या सांस लेने में सामान्य से ज्यादा परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
सांस लेने में बहुत अधिक कठिनाई, पूरा वाक्य बोलने में परेशानी, होंठों का नीला पड़ना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
वायु प्रदूषण और बदलते मौसम के बीच अस्थमा तथा COPD से पीड़ित लोगों को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। AQI की निगरानी, प्रदूषण वाले स्थानों से दूरी, घर के अंदर साफ हवा और निर्धारित दवाओं का नियमित इस्तेमाल जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं।
सांस की परेशानी बढ़ने पर खुद इलाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। सही देखभाल और सावधानी अपनाकर मरीज खराब एयर क्वालिटी के दौरान भी अपनी सेहत को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है।

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