यूपी में हिजाब पर घमासान! मायावती-ओवैसी आमने-सामने
उत्तर प्रदेश में हिजाब को लेकर छिड़ा विवाद अब सिर्फ स्कूल की ड्रेस तक सीमित नहीं रहा...इस मुद्दे ने सीधे यूपी की सियासत में एंट्री कर ली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद जहां एक तरफ बहस तेज हुई, वहीं अब दो बड़े नेताओं के बयान ने इस पूरे मामले को और गरमा दिया है। जी हां एक तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती हैं, जो कह रही हैं कि ऐसे संवेदनशील धार्मिक मामलों को कोर्ट-कचहरी की लड़ाई बनाने के बजाय बातचीत और समझदारी से स्थानीय स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए। तो वहीं दूसरी तरफ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैं, जिन्होंने हाईकोर्ट के फैसले पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। ओवैसी ने पूछा है कि आखिर अदालत कैसे तय कर सकती है कि इस्लाम में क्या जरूरी है और क्या नहीं? यानी एक ही मुद्दे पर दो अलग-अलग आवाजें...आइए, देखते हैं यूपी के इस सबसे बड़े सियासी और कानूनी संग्राम की पूरी इनसाइड रिपोर्ट!
दरअसल, मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा था। एक मुस्लिम छात्रा ने स्कूल की यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी। छात्रा की याचिका पर हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सकी कि हिजाब पहनना उसके धर्म का ऐसा अनिवार्य हिस्सा है, जिसके बिना उसकी धार्मिक आस्था प्रभावित होती है। यही फैसला अब बहस का केंद्र बन गया है। और इसी बीच मायावती और ओवैसी की एंट्री ने इस विवाद को राजनीतिक रंग दे दिया है। इस पूरे सियासी बवंडर के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबी पोस्ट लिखकर संयम और समझदारी का संदेश दिया...उन्होंने अपने बयान की शुरुआत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान का जिक्र करते हुए की। मायावती ने लिखा कि....
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने एक सेक्युलर और समतामूलक संविधान दिया है, जो हर जाति और धर्म के लोगों को अपनी मान्यताओं के हिसाब से जीने का अधिकार देता है. स्कूल यूनिफॉर्म, पर्दा या हिजाब जैसे संवेदनशील मुद्दों को ज्यादा तूल देकर कोर्ट-कचहरी का कानूनी मुद्दा बनाने के बजाय स्कूल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए.
वहीं अब आते हैं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर। ओवैसी ने इस मामले में मायावती से बिल्कुल अलग और ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। हैदराबाद के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
वहीं अब बड़ा सवाल यही है कि हिजाब पर आगे क्या होगा? तो आपको बता दें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद बहस अभी खत्म नहीं हुई है। एक तरफ स्कूलों में यूनिफॉर्म, अनुशासन और संस्थागत नियमों की बात है। दूसरी तरफ धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत अधिकार और संविधान के तहत मिले अधिकारों की बात है। मामला अदालत से निकलकर अब राजनीतिक मंचों तक पहुंच चुका है। मायावती ने जहां संयम और स्थानीय समाधान की लाइन पकड़ी है...वहीं ओवैसी ने अदालत के फैसले पर ही सवाल उठाकर इस मुद्दे को संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों की बहस में बदल दिया है। और यूपी की राजनीति में जब कोई मुद्दा धर्म, संविधान, महिला सम्मान और शिक्षा जैसे सवालों से जुड़ जाए...तो फिर उसका राजनीतिक असर दूर तक जाना तय माना जाता है। ऐसे में यूपी में हिजाब पर छिड़ी बहस ने अब नया मोड़ ले लिया है। फिलहाल गेंद अदालत, सरकार और राजनीतिक दलों, तीनों के पाले में है...लेकिन नजर जनता की अदालत पर रहेगी कि वह इस पूरे विवाद को किस नजरिए से देखती है।
No Previous Comments found.