पिछला कार्यकाल तो सिर्फ ट्रेलर था, असली फिल्म अब शुरू होगी, गरजे असम मुख्यमंत्री!
पूर्वोत्तर के द्वार असम से आज वो खबर आ रही है जिसने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है! गुवाहाटी के खानापारा मैदान में जब जय श्री राम और जय आई असोम के नारे गूंजे, तो पूरा देश देखता रह गया। जी हां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में, भगवा लहर पर सवार होकर असम के चाणक्य कहे जाने वाले डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। यह सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि कांग्रेस के अभेद्य किले को पूरी तरह ध्वस्त करने वाले उस योद्धा की जीत है, जिसने साबित कर दिया कि असम की मिट्टी में अब सिर्फ विकास और राष्ट्रवाद की खुशबू महकेगी। आइए देखते हैं कि कैसे एक गैर-कांग्रेसी नेता ने लगातार दूसरी बार सत्ता की कुर्सी पर बैठकर इतिहास रच दिया!
आपको बता दें आज मंगलवार का दिन असम के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने ठीक सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस शपथ के साथ ही हिमंता असम के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं, जिन्होंने लगातार दो बार मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया है। खानापारा का वेटरनरी मैदान गवाह बना उस पल का, जब एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट से आसमान गुंजा दिया। आपको बता दें यह समारोह किसी विजय उत्सव से कम नहीं था।
मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद थे, जिनके स्वागत के लिए हिमंता सोमवार रात ही एयरपोर्ट पहुंच गए थे। उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों का तांता लगा रहा। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस, राजस्थान के भजनलाल शर्मा और बिहार के सम्राट चौधरी जैसे दिग्गजों ने इस समारोह की रौनक बढ़ाई। वहीं हिमंता के साथ चार मंत्रियों ने भी शपथ ली, जो इस नई सरकार के मुख्य स्तंभ होंगे:
अजंता नियोग: भाजपा की कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री।
अतुल बोरा: AGP के प्रमुख और कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञ।
चरण बोरो: BPF के कद्दावर नेता और परिवहन विभाग के पूर्व सारथी।
रामेश्वर तेली: पूर्व केंद्रीय मंत्री, जिनकी अब राज्य की मुख्य राजनीति में धमाकेदार वापसी हुई है।
वहीं शपथ लेने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा का तेवर वही पुराना और आक्रामक दिखा। उन्होंने साफ शब्दों में संकल्प लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका पिछला कार्यकाल तो महज एक ट्रेलर था, विकास की असली पूरी फिल्म तो इस दूसरे कार्यकाल में दिखाई देगी। उन्होंने साफ कर दिया कि स्वदेशी समुदायों के भूमि अधिकारों की रक्षा और असम का कायाकल्प उनकी प्राथमिकता बनी रहेगी। जाहिर है असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे किसी सुनामी से कम नहीं थे। 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने रिकॉर्ड 102 सीटों पर कब्जा किया। इसमें अकेले भाजपा ने 82 सीटें जीतकर विपक्ष की कमर तोड़ दी। सहयोगी दल AGP और BPF ने 10-10 सीटें जीतकर गठबंधन को हिमालय जैसी मजबूती दी।
2016 में सर्बानंद सोनोवाल के साथ शुरू हुआ यह सफर अब हिमंता के नेतृत्व में और भी प्रचंड हो गया है। आपको बता दें हिमंता बिस्वा सरमा का व्यक्तित्व जितना प्रभावशाली है, उतना ही चर्चाओं में भी रहता है। उनके पिछले कार्यकाल में बाल विवाह पर स्ट्राइक, सरकारी मदरसों को बंद करना और बहुविवाह के खिलाफ उठाए गए कदमों ने काफी सुर्खियां बटोरीं। विपक्ष ने उन पर ध्रुवीकरण के आरोप लगाए, लेकिन जनता ने उनके काम और असम फर्स्ट की नीति पर अपनी मुहर लगा दी। 1996 में अपनी पहली हार से लेकर 2001 से लगातार जलुकबारी सीट पर राज करने वाले हिमंता आज पूर्वोत्तर के सबसे ताकतवर राजनेता बन चुके हैं।
देखा जाए तो ये है असम की वो नई तस्वीर, जो पूरे पूर्वोत्तर को नई दिशा देने वाली है। हिमंता बिस्वा सरमा ने साफ कर दिया है कि उनका इरादा न झुकने का है और न रुकने का। वहीं अब नजरें टिकी हैं मंत्रिमंडल के विस्तार पर, जिसमें करीब 18-19 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। लेकिन एक बात साफ है कि असम की कमान अब एक ऐसे हाथ में है जो राजनीति के दांव-पेंच भी जानता है और शासन की बारीकियां भी। विरोधियों के लिए चुनौती बड़ी है, क्योंकि हिमंता का ट्रेलर ही जब इतना धमाकेदार था, तो सोचिए फिल्म कैसी होगी!

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