हिंदी का वैश्विक प्रभाव: 8 देशों में भी बज रहा है हिंदी का डंका

हिंदी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है, यह वही दिन है जब 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में मान्यता दी थी और 1953 से इसे पूरे देश में आधिकारिक रूप से मनाया जाने लगा। हिंदी दिवस 2025 न केवल हमारी मातृभाषा के सम्मान का अवसर है, बल्कि यह याद दिलाता है कि यह भाषा भारत की सीमाओं से कहीं आगे तक अपनी छाप छोड़ चुकी है।

आज हिंदी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और लगभग 60 करोड़ लोग इसे बोलते हैं। विदेशों में बसे भारतीय समुदाय और वहां की स्थानीय संस्कृतियों में भी हिंदी की मिठास सुनाई देती है। आइए जानते हैं उन प्रमुख 8 देशों के बारे में जहां हिंदी अपनी खास जगह बना चुकी है।

1. अमेरिका
अमेरिका में करीब 6 लाख से अधिक लोग हिंदी बोलते हैं। अंग्रेजी का दबदबा होने के बावजूद घरों और सांस्कृतिक आयोजनों में हिंदी का प्रयोग आम है। यहां यह 11वीं सबसे लोकप्रिय भाषा मानी जाती है।

2. ब्रिटेन
ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में रहते हैं। हिंदी फिल्मों, टीवी और साहित्य के माध्यम से यहां हिंदी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। छात्रों और प्रवासियों की बढ़ती संख्या इसका प्रमुख कारण है।

3. कनाडा
कनाडा में खासकर टोरंटो और वैंकूवर जैसे शहरों में हिंदी भाषी समुदाय सक्रिय है। यहां अंग्रेजी और फ्रेंच के साथ हिंदी ने भी अपनी जगह बना ली है।

4. फिजी
फिजी में हिंदी की स्थिति विशेष है क्योंकि इसे वहां की आधिकारिक भाषाओं में गिना जाता है। उत्तर भारत से गए लोगों ने ‘फिजियन हिंदी’ को जन्म दिया, जो आज भी बड़ी संख्या में बोली जाती है।

5. बांग्लादेश
हालांकि यहां की आधिकारिक भाषा बांग्ला है, लेकिन भारत से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण हिंदी बोलने और समझने वालों की कमी नहीं है।

6. पाकिस्तान
भारत और पाकिस्तान के साझा इतिहास के कारण यहां भी हिंदी समझी और बोली जाती है। उर्दू और अंग्रेजी प्रमुख भाषाएं हैं, लेकिन कई परिवार हिंदी बोल सकते हैं।

7. नेपाल
नेपाल में हिंदी बेहद लोकप्रिय है। नेपाली के बाद हिंदी यहां खूब बोली और समझी जाती है। भारत-नेपाल की खुली सीमा और सांस्कृतिक रिश्तों ने हिंदी को यहां आम भाषा बना दिया है।

8. मॉरीशस
मॉरीशस में हिंदी न केवल बोली जाती है बल्कि स्कूलों में पढ़ाई भी जाती है। यहां की लगभग एक-तिहाई आबादी हिंदी बोलती है और यह स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा है।

हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पहचान और गर्व का प्रतीक है। भारत के बाहर भी करोड़ों लोग हिंदी बोलते हैं और अपने बच्चों को इस भाषा से जोड़ते हैं। सच कहा जाए तो हिंदी अब सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की धड़कन बन चुकी है।

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