हिंदू मंदिर में मुस्लिम पुजारी, 14 पीढ़ियों से देवी माता की पूजा करता आ रहा परिवार

राजस्थान के जोधपुर जिले से आस्था और सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी कहानी सामने आती है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। यहां एक देवी मंदिर की पूजा की जिम्मेदारी एक मुस्लिम परिवार के पास है। परिवार के लोग मंदिर में देवी की आराधना करते हैं, वहीं अपने धर्म के मुताबिक नमाज भी अदा करते हैं। खास बात यह है कि यह कोई नई शुरुआत नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है।

600 साल पुराने मंदिर से जुड़ी है मान्यता

यह मंदिर जोधपुर के भोपालगढ़ क्षेत्र के बागोरिया गांव में स्थित है और इसे बागोरिया माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक मंदिर करीब छह शताब्दी पुराना है और बागोरिया माता को गांव की कुलदेवी माना जाता है।

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मंदिर की परंपरा से जुड़ी कई लोककथाएं आज भी गांव और आसपास के इलाकों में सुनाई जाती हैं। इन्हीं कहानियों में एक मुस्लिम परिवार का जिक्र भी आता है, जिसके पूर्वजों ने देवी की सेवा का संकल्प लिया था।

कैसे शुरू हुई पूजा की परंपरा?

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई सदियों पहले एक मुस्लिम परिवार जैसलमेर इलाके से अकाल के कारण दूसरी जगह की तलाश में निकल पड़ा था। सफर के दौरान उनका ऊंट घायल हो गया और बागोरिया गांव के पास उन्हें रुकना पड़ा।

कहा जाता है कि परिवार के लोगों ने उस समय देवी से प्रार्थना की। मान्यता है कि प्रार्थना के बाद ऊंट ठीक हो गया। इसके बाद परिवार का देवी के प्रति विश्वास और गहरा हो गया।

एक दूसरी प्रचलित मान्यता के अनुसार, मुश्किल दौर में परिवार के एक सदस्य को सपने में माता के दर्शन हुए। सपने में उन्हें पहाड़ी पर मौजूद एक बावड़ी के बारे में बताया गया। जब परिवार वहां पहुंचा तो उन्हें देवी की प्रतिमा मिली। इसके बाद उन्होंने वहीं रहकर माता की सेवा करने का फैसला किया।

धीरे-धीरे यही सेवा एक पारिवारिक परंपरा बन गई, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती चली गई।

मंदिर में पूजा भी, अपने धर्म की इबादत भी

आज इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले परिवार के सदस्य मंदिर में भोपा के तौर पर देवी की पूजा-अर्चना करते रहे हैं। परिवार के लिए मंदिर की सेवा और उनकी मुस्लिम धार्मिक पहचान, दोनों साथ-साथ चलती हैं।

मंदिर से जुड़े परिवार के सदस्यों ने बताया है कि नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनके मुताबिक मंदिर में आने वाले लोगों के साथ किसी तरह का धार्मिक भेदभाव नहीं किया जाता।

किले से भी जुड़ी है एक मान्यता

बागोरिया माता मंदिर के बारे में एक और दिलचस्प कहानी स्थानीय स्तर पर प्रचलित है। कहा जाता है कि एक राजा इस स्थान पर किला बनवाना चाहते थे। कई महीनों तक निर्माण का प्रयास किया गया, लेकिन लोकमान्यता के अनुसार दिन में बनाई गई संरचना रात तक दोबारा पहले जैसी हो जाती थी।

इसके बाद यह माना गया कि माता की इच्छा यहां किले के बजाय उनके मंदिर की स्थापना की थी। इसी वजह से आज भी इस स्थान को देवी की विशेष शक्ति से जोड़कर देखा जाता है।

कभी सूखती नहीं मंदिर की बावड़ी?

मंदिर में मौजूद बावड़ी भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय लोगों का दावा है कि राजस्थान के कई इलाकों में पानी की समस्या के बावजूद इस बावड़ी में पानी बना रहता है।

श्रद्धालु इसे माता का आशीर्वाद मानते हैं और इससे जुड़ी कई चमत्कारिक कथाएं सुनाते हैं। इसी वजह से बागोरिया माता मंदिर आसपास के गांवों के लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

पुजारी के निधन के बाद फिर चर्चा में आया मंदिर

कुछ समय पहले मंदिर की सेवा करने वाले जमालुद्दीन खान का निधन हो गया। इसके बाद मंदिर और उससे जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा का वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में आ गया।

बागोरिया माता मंदिर की कहानी सिर्फ एक धार्मिक स्थल की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कई जगहों पर आस्था और परंपरा ने धर्म की सीमाओं से अलग अपनी एक पहचान बनाई है। मुस्लिम परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही देवी सेवा इसी अनोखी विरासत का उदाहरण मानी जाती है।

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