हींग की खेती से कमाएँ अच्छी कमाई, जानें आसान तरीका
हींग (Asafoetida) भारत में मसालों में सबसे कीमती और मांग वाली जड़ी-बूटी है। इसकी खेती से किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। आइए जानते हैं हींग की खेती करने का तरीका, लाभ और सावधानियां।
हींग की खेती के लिए जरूरी बातें
मौसम और जलवायु
हींग की खेती शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में अच्छी होती है।
अधिक वर्षा या जलभराव वाली जमीन इसके लिए उपयुक्त नहीं है।
तापमान 20-35°C के बीच होना चाहिए।
भूमि का चयन
रेतीली-बलुई या दोमट मिट्टी हींग के लिए उत्तम होती है।
जमीन का जल निकास अच्छा होना चाहिए।
PH स्तर 7.0–8.5 तक उपयुक्त है।
बीज और रोपण
हींग की खेती मुख्यतः बीज या रूटलेट से की जाती है।
बीज को 5-10 सेंटीमीटर गहरे और 30-40 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाना चाहिए।
रोपाई का समय अक्टूबर-नवंबर में सबसे अच्छा है।
सिंचाई और देखभाल
हल्की सिंचाई की जरूरत होती है। अधिक पानी जड़ों को सड़ सकता है।
खरपतवार नियंत्रण नियमित करना जरूरी है।
उर्वरक के रूप में कार्बनिक खाद या गोबर की खाद का उपयोग करें।
हींग की कटाई और भंडारण
हींग की खेती में जड़ से रेजिन निकलता है, यही असली हींग होती है।
आमतौर पर पौधों की उम्र 2–3 साल के बाद ही जड़ से हींग निकाली जाती है।
जड़ की सफाई और सुखाने के बाद हींग को बाजार में बेचा जाता है।
सही तरीके से संग्रहित करने पर हींग की गुणवत्ता बनी रहती है।
लाभ और मुनाफा
हींग का मूल्य बहुत अधिक होता है, 1 किलो हींग से 300–500 रुपये तक की आमदनी हो सकती है (स्थानीय बाजार के हिसाब से)।
कम निवेश में शुरू की जाने वाली खेती लंबे समय तक लाभकारी होती है।
हींग की मांग घरेलू मसालों, औषधीय और आयुर्वेदिक उद्योग में हमेशा बनी रहती है।
सावधानियां
मिट्टी में पानी का जमाव न होने दें, क्योंकि जड़ सड़ सकती है।
खेत में खरपतवार साफ रखें।
पौधों को कीट और रोगों से बचाने के लिए जैविक या प्राकृतिक उपाय अपनाएं।
हींग की खेती एक कम निवेश, उच्च लाभ वाली खेती है। सही मिट्टी, समय पर रोपण, नियमित देखभाल और सावधानी के साथ किसान इसे सालाना अच्छी कमाई के लिए कर सकते हैं।


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