बजट के दिन हाथ में ब्रीफकेस लेकर क्यों आते हैं वित्त मंत्री? जानिए इस बैग का इतिहास

यूनियन बजट 2026 जल्द ही पेश होने वाला है, और हर साल की तरह इस बार भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में उस प्रसिद्ध ब्रीफकेस के साथ दिखेंगी। इस ब्रीफकेस में वित्त मंत्री अपने वार्षिक वित्तीय विवरण जिसे आम बोलचाल में 'बजट' कहा जाता है के दस्तावेज लेकर आते हैं। यह परंपरा मीडिया के सामने पोज़ देने और सदन में भाषण देने से पहले हमेशा निभाई जाती है।

Nirmala Sitharaman | Life, Career, & India's Finance Minister | Britannica  Money

दिलचस्प बात यह है कि भारत के संविधान में 'बजट' शब्द का कोई उल्लेख नहीं है। इसे औपचारिक रूप से वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है। लेकिन ‘बजट’ शब्द की लोकप्रियता उसी चमड़े के बैग से जुड़ी है।

बजट की शुरुआत कैसे हुई

इस परंपरा की जड़ें ब्रिटिश संसद तक जाती हैं। 1733 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री (Chancellor of the Exchequer) रॉबर्ट वॉलपोल ने संसद में देश की वित्तीय स्थिति पेश करते समय अपने भाषण और दस्तावेज़ चमड़े के बैग में रखे थे। फ्रेंच में इस चमड़े के बैग को ‘Bougette’ कहा जाता था, जो बाद में धीरे-धीरे ‘Budget’ बन गया। संसद में लोग बैग खोलने को कहते “बजट खोलिए, देखें इसमें क्या है।” यही से ‘बजट’ शब्द जन्मा।Who Is Nirmala Sitharaman, Finance Minister, Presenting Her 9th Consecutive  Budget In 2026

भारत में अंग्रेजों की परंपरा

ब्रिटिश दौर की यह परंपरा भारत में भी अपनाई गई। आज़ादी के बाद, 26 जनवरी 1947 को पहले भारतीय वित्त मंत्री आरके शानमुखम चेट्टी ने भी बजट पेश करते समय लेदर बैग साथ लाया।

ब्रीफकेस का रंग और आकार

बीते कई दशकों में ब्रीफकेस का आकार लगभग समान रहा, लेकिन रंग बदलता रहा।

  • काले ब्रीफकेस: जवाहरलाल नेहरू, यशवंत सिन्हा, मनमोहन सिंह (1991 का परिवर्तनकारी बजट)
  • लाल ब्रीफकेस: प्रणब मुखर्जी, पीयूष गोयल
  • ब्राउन और रेड ब्रीफकेस: अरुण जेटली

इस परंपरा ने आज भी अपनी पहचान बनाए रखी है, और हर बजट पेश करने वाला वित्त मंत्री इस ब्रीफकेस के माध्यम से अपनी वित्तीय योजना संसद और जनता के सामने रखता है।Nirmala Sitharaman ditches briefcase for red bag to carry Budget papers

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