Holi Celebration: देव आनंद एक एवरग्रीन एक्टर, होली के रंगों से दूर क्यों रहते थे? Rk स्टूडियो भी नहीं जाते थे
देव आनंद का नाम आते ही आंखों के सामने एक रंगीन, मॉडर्न, एवरग्रीन, हैंडसम और स्टाइलिश अभिनेता की छवि उभर आती है। देव आनंद अपनी आकर्षक पर्सनालिटी के चलते सदाबहार और चिरयुवा कलाकार कहलाए, जिनकी फिल्मों के गीत जैसे रंगीला रे, तेरे रंग में क्यों रंगा है (प्रेम पुजारी), फूलों के रंग से, शोखियों में घोला जाए या पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले जीवन, प्रेम और जोश से भरपूर नजर आते हैं।

उनके किरदार हमेशा ज़िंदगी का जश्न मनाते दिखे, हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाले लगे, इसलिए यह जानकर हैरानी होती है कि वही देव आनंद होली के रंगों से दूरी बनाए रखते थे। उन्होंने अपनी बिंदास सोच को जाहिर करने के लिए अपनी आत्मकथा का नाम Romancing with Life रखा, जो उनके जीवन-दर्शन को पूरी तरह बयान करता है।
हिंदी सिनेमा के स्वर्ण युग में, जब होली फिल्मों के गीतों और कहानियों का अहम हिस्सा हुआ करती थी, तब भी देव आनंद न तो होली खेलते थे और न ही उनकी फिल्मों में आम तौर पर कोई चर्चित होली गीत दिखाई देता है। स्वर्ण युग के त्रिदेव दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद आपस में गहरे मित्र थे, और राज कपूर के आरके स्टूडियो की होली में अमिताभ बच्चन जैसे तमाम सितारे रंगों में डूबे नजर आते थे, लेकिन खास दोस्त होने के बावजूद देव आनंद वहां भी कभी शामिल नहीं हुए।

राज कपूर उनके मिज़ाज को समझते थे, इसलिए उन्होंने कभी ज़ोर नहीं दिया। दरअसल, देव आनंद की जीवनशैली काफ़ी वेस्टर्नाइज्ड थी खास पोशाक, बंद गले की कमीज़, स्टाइलिश ब्लेज़र और शूज़ और माना जाता है कि वे घर में भी इसी सलीके और एलिगेंस के साथ रहना पसंद करते थे। शायद यही वजह थी कि रंगों की उन्मुक्त मस्ती उनकी निजी पसंद से मेल नहीं खाती थी; वे रंगों से दूर रहे, लेकिन उनकी ज़िंदगी और सिनेमा हमेशा रंगीन रहे।
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