देश के इन हिस्सों में नहीं मनाई जाती होली, रंगों से खेलना तो दूर छूते तक नहीं यहां के लोग
जब भारत में फाल्गुन की धूप खिलती है, हवा में गुलाल और रंगों की महक फैली होती है, लोग होली के जोश में खुद को रंगों में सराबोर कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे देश में ऐसी जगहें भी हैं, जहाँ होली का उत्सव कभी नहीं मनाया जाता? हाँ, सही सुना आपने! ये वो रहस्यमयी स्थान हैं, जहां रंगों की बजाय मान्यताओं, पूजा-पाठ और पुराने व्रतों का बोलबाला है। आइए जानते हैं उन चार अद्भुत और चौंकाने वाले जगहों के बारे में:
1. महाबलीपुरम, तमिलनाडु
सागर की लहरों और प्राचीन मंदिरों की नगरी महाबलीपुरम में होली का जश्न कहीं दिखाई नहीं देता। यहाँ के लोग होली के दिन “मासी मगम” नामक धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग के देवी-देवता और आत्माएं धरती पर आती हैं। इसलिए यहाँ रंगों से खेलने की बजाय पूजा-पाठ और भक्ति में दिन बिताया जाता है।
2. रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड
उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों और घाटियों में छुपा रुद्रप्रयाग जिले का क्विली और कुरझान गांव भी होली से दूर है। यहाँ की इष्ट देवी त्रिपुरा सुंदरी शोर-शराबा बिलकुल पसंद नहीं करतीं। इसलिए लोग देवी के आशीर्वाद और परंपरा को बनाए रखने के लिए होली का उत्सव नहीं मनाते।
3. रामसन, गुजरात
गुजरात के बनासकांठा जिले का रामसन गांव पिछले 200 सालों से होली से अनजान है। स्थानीय कहानियों के अनुसार, एक राजा की गलत हरकतों पर संतों का क्रोध आया और उन्होंने गांव को श्राप दिया कि अगर यहाँ होली मनाई गई, तो बुरा समय आएगा। तब से यह परंपरा बनी हुई है और आज भी गाँव के लोग इस नियम का पालन करते हैं।
4. दुर्गापुर, झारखंड
झारखंड के बोकारो जिले का दुर्गापुर गांव भी होली की हंसी-खुशी से कोसों दूर है। कहा जाता है कि लगभग सौ साल पहले राजा के बेटे की होली के दिन मृत्यु हुई थी। दुःख में राजा ने आदेश दिया कि होली न मनाई जाए। फिर खुद राजा की भी मौत होली पर हो गई। तब से यहाँ के लोग राजा के आदेश का सम्मान करते हुए आज तक होली नहीं मनाते।

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