मायके जाकर मनाई जाती है शादी के बाद की पहली होली, इस परंपरा के पीछे छिपा है गहरा राज

भारतीय संस्कृति में शादी के बाद आने वाले पहले त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है और इन्हीं में होली को लेकर एक सदियों पुरानी परंपरा चली आ रही है, जिसके अनुसार नई नवेली दुल्हन अपनी शादी के बाद की पहली होली ससुराल में नहीं, बल्कि मायके में मनाती है। मान्यता है कि विवाह के बाद बेटी नए वातावरण और जिम्मेदारियों में ढलती है, ऐसे में मायके जाकर पहली होली मनाना उसे मानसिक और भावनात्मक संबल देता है। धार्मिक दृष्टि से भी इसे शुभ माना गया है, क्योंकि मायके में माता-पिता और परिवार के साथ मनाई गई पहली होली बेटी के सुखद वैवाहिक जीवन की कामना का प्रतीक होती है। वर्ष Holi 2026 में यह पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा और परंपरा के अनुसार इस समय कई नई दुल्हनें अपने मायके में रहकर होली का उल्लास मनाएंगी। यह परंपरा केवल एक सामाजिक रिवाज नहीं, बल्कि प्रेम, अपनत्व और बेटी के सम्मान से जुड़ी गहरी सांस्कृतिक भावना को दर्शाती है।

जानें पहली होली पर क्यों साथ नहीं रहती सास-बहू, क्या है इसके पीछे की पौराणिक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नई बहू और उसकी सास को साथ में होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। शास्त्रों में माना गया है कि यदि सास और बहू एक ही समय में जलती हुई होलिका की अग्नि देखें, तो इससे उनके संबंधों में खटास आ सकती है और घर की सुख-शांति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन इसमें दहन यानी जलने की प्रक्रिया शामिल होती है। हिंदू धर्म में नई शादी के तुरंत बाद किसी भी प्रकार की नकारात्मकता या अशुभ संकेत को वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता। इसलिए, परंपरा के अनुसार नई दुल्हन को उसकी पहली होली मायके में मनाने भेजा जाता है, ताकि वैवाहिक जीवन में प्यार, सौहार्द और समृद्धि बनी रहे।

सबसे जुदा होली: सास-बहू प्यार से एक दूसरे को लगाते है गुलाल, नहीं होती  खिटपिट, 50 सालों से चली आ रही परंपरा - most unique Holi celebration in  Burhanpur where Mother in

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के पहले साल में ग्रहों की स्थिति समय-समय पर अनुकूल या प्रतिकूल हो सकती है। फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को होलिका दहन के दौरान अग्नि का प्रभाव अत्यधिक माना जाता है। ससुराल में नई बहू का प्रवेश एक नए भाग्य और नई जिम्मेदारियों के आरंभ के रूप में देखा जाता है, इसलिए किसी भी अशुभ प्रभाव से बचाने के लिए ज्योतिषीय सलाह के अनुसार इस दौरान नई बहू को पहली होली मायके में बिताने की परंपरा है। यह उपाय वैवाहिक जीवन में सुरक्षा, सौभाग्य और खुशहाली बनाए रखने के लिए अपनाया जाता है।

 

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