लघु कथा – सच्चाई का फल

एक शहर में मोहन नाम का एक दुकानदार रहता था। वह अपनी ईमानदारी के लिए जाना जाता था। एक दिन एक ग्राहक उसकी दुकान से सामान खरीदकर चला गया, लेकिन गलती से अपना बटुआ वहीं छोड़ गया।

मोहन ने बटुआ उठाया और देखा कि उसमें बहुत सारे पैसे और ज़रूरी काग़ज़ थे। कुछ लोगों ने उससे कहा,
“मोहन, यह बटुआ रख लो, कौन देखने वाला है?”

मोहन ने शांत स्वर में कहा,
“अगर मैं आज बेईमानी करूँगा, तो खुद की नज़रों में गिर जाऊँगा।”

अगले दिन वह ग्राहक वापस आया। मोहन ने उसे पूरा बटुआ लौटा दिया। ग्राहक की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने मोहन को इनाम देना चाहा, लेकिन मोहन ने मना कर दिया।

कुछ समय बाद वही ग्राहक मोहन की ईमानदारी से प्रभावित होकर उसकी दुकान का स्थायी ग्राहक बन गया और उसकी दुकान खूब चलने लगी।

नैतिक शिक्षा :
ईमानदारी हमेशा विश्वास और सम्मान दिलाती है, और अंत में सफलता भी।

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