भारत में तेजी से बढ़ रहा शहद उत्पादन, लेकिन कीमत बनी चुनौती...

भारत में शहद का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। 2025 में भारत ने करीब 1.46 लाख टन शहद का उत्पादन किया था, जो 2026 में बढ़कर लगभग 1.54 लाख टन पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, उत्पादन के मामले में चीन अभी भी दुनिया में सबसे आगे है। चीन का उत्पादन 2025 के करीब 5.30 लाख टन से बढ़कर 2026 में 5.50 लाख टन होने का अनुमान है।

चीन सबसे आगे, तुर्की-ईरान में गिरावट

दुनिया में सबसे ज्यादा शहद उत्पादन चीन करता है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने की रफ्तार में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं, शहद उत्पादन में तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाले तुर्की और ईरान में उत्पादन में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। दुनियाभर में शहद की मांग लगातार बनी हुई है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा आयातक देश है।

उत्पादन बढ़ा, लेकिन कीमत बनी चुनौती

भारत के लिए बड़ी चुनौती यह है कि उत्पादन और एक्सपोर्ट बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय शहद को अपेक्षित कीमत नहीं मिल रही है। APEDA और CRISIL की संयुक्त रिपोर्ट में भी भारतीय शहद की कीमतों में गिरावट के इस ट्रेंड का उल्लेख किया गया है। इसके विपरीत ब्राजील का शहद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दाम पर बिकता है।

ग्लोबल मार्केट में पहचान मजबूत करने की कोशिश

भारत अब वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हाल ही में APEDA की मदद से एक किसान उत्पादक संगठन ने सरसों के शहद की खेप दुबई एक्सपोर्ट की। इसके साथ ही हिमालयी क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देकर शहद की गुणवत्ता और वैरायटी सुधारने की कोशिश की जा रही है। लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय शहद को बेहतर पहचान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत दिलाना भी है।

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