होर्मुज खुलेगा या ईरान जलेगा? ट्रंप की 'आज रात' वाली डेडलाइन और तबाही का काउंटडाउन।

दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है और माचिस की तीली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ में है। जी हां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब सिर्फ जुबानी जंग नहीं, बल्कि एक भीषण और निर्णायक युद्ध में बदल चुका है। डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया को हिला देने वाली चेतावनी दी है कि आज रात तक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' खोलो, वरना ईरान को एक ही रात में खत्म कर दिया जाएगा।

दरअसल, ट्रंप ने आज मंगलवार को 'पावर प्लांट डे' और 'पुलों का दिन' घोषित कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अगर ईरान ने दुनिया की तेल सप्लाई लाइन यानि होर्मुज जलडमरूमध्य से अपना कब्जा नहीं हटाया, तो चंद घंटों के भीतर ईरान के बिजली घर, पुल और पूरा सप्लाई नेटवर्क मलबे के ढेर में तब्दील हो जाएगा। ट्रंप की रणनीति अब दबाव बनाने की नहीं, बल्कि सीधे एक्शन और ईरान की सैन्य व आर्थिक कमर तोड़ने की है। वहीं ट्रंप की इस आक्रामक धमकी पर ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने आग उगलते हुए कहा है कि ट्रंप के ये लापरवाह कदम दुनिया को एक जीते-जागते नरक में धकेल देंगे। ईरानी सेना ने ट्रंप के दावों को भ्रम करार देते हुए कहा है कि ये धमकियां उस अपमान की भरपाई नहीं कर सकतीं जो अमेरिका को इस इलाके में झेलना पड़ा है। ईरान ने 45 दिनों के सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा कर साफ कर दिया है कि उन्हें अधूरा समझौता नहीं, बल्कि युद्ध का स्थायी अंत चाहिए।

आपको बता दें इन सबके बीच सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई को लेकर आ रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, मुज्तबा पिछले कई दिनों से सार्वजनिक रूप से नहीं देखे गए हैं। खबर है कि वे बेहद अस्वस्थ हैं और कोम शहर में बेहोश पड़े हैं। दरअसल, 28 फरवरी को जिस अमेरिकी-इजरायली हमले में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे, उसी हमले में मुज्तबा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। खूफिया जानकारी के मुताबिक, कोम शहर में एक विशाल मकबरा बनाया जा रहा है। 'दावा है कि यह मकबरा सिर्फ बड़े खामेनेई के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए है, जो इस बात का संकेत है कि मुज्तबा खामेनेई की हालत भी बेहद गंभीर है और वे किसी भी समय दम तोड़ सकते हैं।

वहीं दूसरी तरफ पिछले 24 घंटों में ईरान के ऊपर कहर बनकर मिसाइलें गिरी हैं। अमेरिका की CENTCOM ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक 13,000 से ज्यादा ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है और 155 ईरानी जहाजों को समुद्र में डुबो दिया है। अमेरिका के परमाणु विमानवाहक जहाज, पनडुब्बियां, F-35 स्टेल्थ फाइटर और B-52 बॉम्बर्स इस वक्त ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को अंजाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं ईरान के करीब एक दर्जन शहरों पर भीषण हमले हुए हैं। 

बहरेस्तान में हवाई हमले में 23 लोग मारे गए, जिनमें 4 मासूम बच्चियां शामिल थीं।

मध्य तेहरान में एक ऐतिहासिक यहूदी प्रार्थना स्थल पर भी मिसाइल गिरी।

तेहरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और करज शहर धमाकों की आवाज से गूंज उठे।

बंदर अब्बास, अहवाज़, शिराज़, इस्फहान और क़ोम में रिहायशी इमारतों को भारी नुकसान पहुँचा है। 

क़ोम में एक इमारत गिरने से 5 और बंदर-ए-लंगेह में 6 लोगों की मौत हो गई।

आपको बता दें ये जंग सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। ईरान के इशारे पर हिज़्बुल्लाह ने पिछले 24 घंटों में इजरायल के खिलाफ 60 से ज्यादा सैन्य ऑपरेशन किए हैं। सुसाइड ड्रोन के जरिए इजरायली सीमावर्ती इलाकों श्लोमी, हनीता और होलाता में कोहराम मचाया गया है। किर्यात शमोना में इजरायली सेना के जमावड़े पर लगातार तीन ड्रोन हमले किए गए हैं। वहीं, गाजा में भी इजरायली हमले जारी हैं, जहाँ एक स्कूल के पास हुए धमाके में 10 शरणार्थियों की जान चली गई।

कुल मिलाकर देखा जाए तो अब सवाल यह नहीं है कि जंग होगी या नहीं, सवाल यह है कि क्या ईरान आज की रात देख पाएगा? ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने में कुछ ही घंटे बचे हैं। एक तरफ ट्रंप का एक रात में खात्मा करने का संकल्प है, तो दूसरी तरफ ईरान का मर मिटने का जिद्दी रुख। अगर होर्मुज नहीं खुला, तो कल की सुबह ईरान के लिए बिजली और पुलों के बिना एक काली सुबह हो सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की गवाह बनने जा रही है? पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम और ट्रंप के अगले आदेश पर टिकी हैं। कल का सूरज शांति लेकर आएगा या सर्वनाश, यह बस चंद घंटों में साफ हो जाएगा। 

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