खसरा-नक्शा नहीं मिला, रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं मिला तो सालों से हो क्या रहा था?
नर्मदापुरम : राजस्व के कागजों में छोटी-सी गलती आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। जमीन का नामांतरण अटक जाए, नक्शे में फर्क निकल आए या रिकॉर्ड दुरुस्त न हो तो किसान और जमीन मालिक महीनों दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। अब यही गड़बड़ियां राजस्व अमले के लिए भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं।
जिले में राजस्व कार्यों की समीक्षा के दौरान 5 पटवारियों पर निलंबन की गाज गिरी है, जबकि 133 अन्य पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कार्रवाई कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर की गई है।
मामला सिर्फ एक-दो कागजों की कमी का नहीं है। समीक्षा में संबंधित पटवारी क्षेत्रों में खसरा और नक्शे का मिलान नहीं होना, राजस्व अभिलेखों का दुरुस्त नहीं पाया जाना और निर्धारित कार्यों को समय-सीमा में पूरा नहीं करना सामने आया। कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
निलंबन की कार्रवाई इटारसी, बनखेड़ी, माखननगर, सिवनी मालवा और सोहागपुर क्षेत्र में पदस्थ पटवारियों के विरुद्ध की गई है। अगर रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं थे, खसरा-नक्शे का मिलान नहीं था और काम समय पर नहीं हो रहा था, तो अब तक इसकी निगरानी कौन कर रहा था?
आम आदमी से तो राजस्व कार्यालय में एक दस्तावेज कम हो जाए तो उसे लौटा दिया जाता है। तारीख निकल जाए तो उसकी परेशानी अलग। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में महीनों या वर्षों तक गड़बड़ी बनी रहे तो उसकी जिम्मेदारी तय होने में इतना वक्त क्यों लगता है?
अब 5 निलंबन और 133 पटवारी को नोटिस के बाद राजस्व महकमे में हड़कंप है। जाहिर है, काम नहीं हुआ तो सिर्फ फाइल नहीं रुकेगी, जिम्मेदारी भी तय होगी।
133 पटवारियों को नोटिस मिलना अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या जिले में राजस्व कार्यों की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर थी कि इतनी बड़ी संख्या में पटवारियों के काम में लापरवाही सामने आई? या फिर लंबे समय से चल रही शिकायतों और रिकॉर्ड की गड़बड़ियों पर अब जाकर सख्ती शुरू हुई है?
कलेक्टर की कार्रवाई से कम से कम इतना जरूर साफ हुआ है कि राजस्व रिकॉर्ड को हल्के में लेने का दौर अब सवालों के घेरे में है।
निलंबन और नोटिस से आगे क्या?
क्या रिकॉर्ड वास्तव में दुरुस्त होंगे?
क्या लंबित राजस्व प्रकरण समय-सीमा में निपटेंगे?
जिस किसान या जमीन मालिक को गलत रिकॉर्ड की वजह से परेशानी उठानी पड़ी, उसे राहत कब मिलेगी?
क्योंकि सरकारी फाइल में एक गलत लाइन सिर्फ एक गलती नहीं होती।
किसी किसान के लिए वही गलती जमीन, पैसा और वर्षों की परेशानी बन सकती है। जिसके लिए उसे तहसील के महीनौ चक्कर काटना पड़ते हैं !
रिपोर्टर : संतोष सिंह चंदेल

No Previous Comments found.