पानी के बीच कैसे बनता है पुल? इंजीनियरिंग का ये राज आपको हैरान कर देगा
क्या आपने कभी सोचा है...? जिस नदी को पार करने में एक नाव को कई मिनट लग जाते हैं...जिस समंदर की गहराई देखकर ही डर लगने लगे...उसी पानी के बीचों-बीच आखिर इतने मजबूत पुल खड़े कैसे कर दिए जाते हैं? पानी के बहाव को रोककर इंजीनियर्स ने वहां जमीन कैसे बनाई होगी? अगर आपके मन में भी ऐसे ही रोमांचक सवाल उठते हैं, तो आज हम आपके इन सारे सवालों से पर्दा उठाने जा रहे हैं।
दरअसल, पानी के ऊपर पुल बनाना सिर्फ सीमेंट, सरिया और कंक्रीट का काम नहीं है...इसके पीछे पानी की रफ्तार से लेकर उसकी गहराई, नदी या समुद्र के तल की मिट्टी और पुल पर पड़ने वाले हजारों टन भार तक का पूरा हिसाब लगाया जाता है। सबसे पहले समझिए कि नदी या समंदर पर पुल बनाना शुरू करने से पहले इंजीनियर सीधे पानी में उतरकर काम शुरू नहीं कर देते। सबसे पहले पूरा सर्वे होता है। पानी कितना गहरा है? बहाव कितना तेज है? नीचे की मिट्टी कैसी है? पुल कितना लंबा होगा? उस पर कितना वजन आएगा? और उस पर चलने वाले वाहनों का भार कितना होगा? इन तमाम सवालों का जवाब तलाशने के बाद तय होता है कि पुल की नींव आखिर कहां और किस तरीके से बनाई जाएगी। वहीं अब सवाल है कि पानी के बीच काम कैसे होगा? यहीं आता है एक बेहद खास स्ट्रक्चर...कॉफरडैम।
कॉफरडैम को आप आसान भाषा में पानी के बीच बनाया गया एक मजबूत सुरक्षा घेरा समझ सकते हैं। स्टील की बड़ी-बड़ी शीट्स से इसे तैयार किया जाता है और क्रेन की मदद से उस जगह लगाया जाता है, जहां पुल का पिलर खड़ा करना होता है।
कॉफरडैम लगने के बाद पानी को उसके अंदर से पाइप के जरिए बाहर निकाला जाता है। जैसे-जैसे पानी बाहर निकलता है, नीचे की जमीन दिखाई देने लगती है। और फिर इंजीनियर इसी जगह पर नींव तैयार करने का काम शुरू करते हैं। अब आती है पुल के दूसरे हिस्से की बारी। पुल का पूरा स्ट्रक्चर हमेशा पानी के बीच ही नहीं बनाया जाता। इसके कई हिस्से दूसरी जगह तैयार किए जाते हैं। इन्हें प्री-कास्ट स्लैब कहा जाता है। इन तैयार हिस्सों को साइट पर लाया जाता है और पिलर्स के ऊपर एक-एक करके सेट किया जाता है।
यानी ऊपर से देखने पर आपको सिर्फ एक पुल नजर आता है...लेकिन पानी के नीचे उसकी एक पूरी दूसरी दुनिया होती है। और यही वजह है कि हर पुल एक जैसा नहीं होता। यानी अगली बार जब आप किसी नदी या समंदर के ऊपर बने विशाल पुल को देखें...तो सिर्फ उसके ऊपर से गुजरने वाली सड़क मत देखिएगा। एक बार नीचे की तरफ भी सोचिएगा...क्योंकि जिस पुल पर आप कुछ मिनटों में गुजर जाते हैं, उसे खड़ा करने के लिए इंजीनियरों ने पानी के अंदर कितनी बड़ी चुनौती का सामना किया होगा, ये कहानी शायद आपको हैरान कर दे।
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