रनिंग के दौरान सांस लेने का सही तरीका: नाक या मुंह? कमांडो स्टाइल टिप्स

रनिंग करते समय सही तरीके से सांस लेना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना दौड़ की दूरी या स्पीड। खासकर अगर आप आर्मी या डिफेंस में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं या फिटनेस बनाए रखना चाहते हैं। इंडियन कमांडो प्रिंस जामवाल के अनुसार, दौड़ते समय नाक और मुंह से सांस लेने का तरीका आपकी बॉडी में ऑक्सीजन सप्लाई और रनिंग परफॉर्मेंस को सीधे प्रभावित करता है।

नाक और मुंह से सांस लेने में अंतर

नाक से सांस लेने पर हवा प्यूरीफाई होकर फेफड़ों में जाती है। यह गर्म और ह्यूमिडिफाइड रहती है, जिससे नर्वस सिस्टम शांत रहता है। वहीं, मुंह से सांस लेने पर अधिक ऑक्सीजन शरीर में जाती है, लेकिन गले में ड्राईनेस हो सकती है और धूल-मिट्टी के कण अंदर जा सकते हैं।

कब नाक से सांस लें?

यदि आप रिलैक्स स्पीड या रिकवरी रन कर रहे हैं, तो नाक से सांस लेने की सलाह दी जाती है। इससे बॉडी और नर्वस सिस्टम शांत रहते हैं और रनिंग की क्वालिटी बेहतर होती है।

लंबी या हाई इंटेंसिटी रन के लिए

स्प्रिंट, 1600 मीटर, 5 किलोमीटर या सेना भर्ती जैसी हाई इंटेंसिटी रनिंग में नाक और मुंह दोनों से सांस लेना चाहिए। इससे कम समय में अधिक ऑक्सीजन मिलती है, मसल्स तक ऑक्सीजन पहुँचती है और शरीर तेज काम कर पाता है।

नाक और मुंह से सांस लेने के फायदे

ज्यादा ऑक्सीजन सप्लाई होती है।

कार्बन डाइऑक्साइड जल्दी बाहर निकलती है।

हाई इंटेंसिटी रनिंग में शरीर की जरूरत पूरी होती है।

सही ब्रीदिंग पैटर्न और तालमेल

इनहेल (सांस अंदर) – नाक और मुंह दोनों से गहरी सांस लें।

एक्सहेल (सांस बाहर) – मुंह से तेजी से सांस छोड़ें।

स्टेप्स के साथ तालमेल – 2 स्टेप तक इनहेल और 2 स्टेप तक एक्सहेल।

कंधे रिलैक्स और छाती खुली रखें। फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए आगे झुककर न दौड़ें।

सही ब्रीदिंग तकनीक से आप 5 किलोमीटर या उससे लंबी दूरी भी बिना थके और बेहतर परफॉर्मेंस के दौड़ सकते हैं।

 

Disclaimer: यह लेख इंस्टाग्राम रील पर आधारित जानकारी पर आधारित है। C News भारत इसकी सत्यता, सटीकता या असर की जिम्मेदारी नहीं लेता। किसी भी तकनीक को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।

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