शरीर में नजर आने वाले इन संकेतों को हल्के में न लें

हमारा शरीर कई बार किसी बीमारी या पोषक तत्वों की कमी के बारे में सीधे नहीं, बल्कि छोटे-छोटे संकेतों के जरिए बताता है। समस्या यह है कि रोजमर्रा की जिंदगी में हम अक्सर इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर कोई परेशानी बार-बार दिखाई दे रही है या लंबे समय तक बनी हुई है, तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

बार-बार बर्फ खाने का मन करना

अगर आपको बिना वजह बर्फ चबाने की इच्छा बार-बार होती है, तो इसे सिर्फ आदत न समझें। कुछ मामलों में यह आयरन की कमी से जुड़ा हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से हीमोग्लोबिन और फेरिटिन जैसी जांच कराई जा सकती है।

नाखूनों का बीच से धंसना

नाखून अगर सामान्य आकार के बजाय अंदर की ओर धंसने लगें और उनका आकार चम्मच जैसा दिखाई देने लगे, तो यह आयरन की कमी से संबंधित हो सकता है। हालांकि, इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए बिना जांच के आयरन की दवा शुरू करना उचित नहीं है।

रात में पैरों में बेचैनी

बिस्तर पर जाने के बाद पैरों को लगातार हिलाने या चलाने की इच्छा हो और आराम करने में परेशानी हो, तो यह रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम का संकेत हो सकता है। कुछ लोगों में इसका संबंध आयरन के कम स्तर से भी पाया जाता है।

गर्दन या बगल की त्वचा का गहरा होना

गर्दन, बगल या शरीर की सिलवटों में त्वचा अगर मोटी, गहरी और मखमली दिखाई देने लगे, तो इसे केवल गंदगी समझकर रगड़ना सही नहीं है। ऐसी त्वचा में बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस से संबंधित हो सकता है और डॉक्टर ब्लड शुगर से जुड़ी जांच की सलाह दे सकते हैं।

हाथ-पैर में बार-बार झनझनाहट

उंगलियों, हाथों या पैरों में लगातार सुन्नपन या झनझनाहट कई कारणों से हो सकती है। इनमें विटामिन B12 की कमी भी एक संभावित वजह है। अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

जीभ में दर्द या जलन

जीभ का लंबे समय तक लाल, संवेदनशील या दर्दनाक रहना हमेशा मसालेदार भोजन का असर नहीं होता। आयरन, विटामिन B12 या फोलेट की कमी भी इस तरह की परेशानी से जुड़ी हो सकती है।

बहुत चिकना और तेज बदबू वाला मल

अगर मल बार-बार असामान्य रूप से चिकना दिखाई दे, उसमें तेज दुर्गंध हो और उसे फ्लश करने में परेशानी हो, तो यह शरीर में वसा के अवशोषण से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने पर पाचन तंत्र और अग्न्याशय से संबंधित जांच की जरूरत पड़ सकती है।

आंखों में पीलापन

आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ना पीलिया का संकेत हो सकता है। इसके साथ गहरे रंग का पेशाब या सामान्य से हल्का मल भी दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति में जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

काला और तारकोल जैसा मल

मल का रंग काला होना हमेशा गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता, क्योंकि आयरन की दवाएं और कुछ अन्य चीजें भी मल का रंग बदल सकती हैं। लेकिन अगर मल बिल्कुल काला और तारकोल जैसा हो, खासकर चक्कर या कमजोरी के साथ, तो पाचन तंत्र में रक्तस्राव की संभावना को देखते हुए तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

कब सावधान होना चाहिए?

इनमें से किसी एक लक्षण का होना अपने आप में किसी बीमारी की पुष्टि नहीं करता। लेकिन अगर कोई संकेत लगातार बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है या उसके साथ कमजोरी, चक्कर, वजन कम होना अथवा अन्य परेशानी भी हो रही है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर उचित जांच कराना बेहतर है। खुद से सप्लीमेंट या दवा लेने के बजाय पहले कारण की पुष्टि करना ज्यादा सुरक्षित रहता है।

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