15 अगस्त की रात के बाद कहाँ चली जाती है देशभक्ति ?

15 अगस्त आते ही हर तरफ देशभक्ति का माहौल दिखाई देता है। तिरंगा शान से लहराता है, सोशल मीडिया पर देशभक्ति के संदेश छा जाते हैं और हम आज़ादी का जश्न मनाते हैं। लेकिन जैसे ही 16 अगस्त आता है, क्या हमारी देशभक्ति भी खत्म हो जाती है?

सड़क किनारे पड़े तिरंगे, कूड़ेदान में दिखाई देने वाले राष्ट्रीय ध्वज और अगले ही दिन सामान्य हो जाने वाली हमारी दिनचर्या एक बड़ा सवाल खड़ा करती है—क्या आज़ादी सिर्फ एक दिन मनाने की चीज़ है?

तिरंगा केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारे देश की आन, बान और शान है। इसके सम्मान की जिम्मेदारी केवल 15 अगस्त तक सीमित नहीं होनी चाहिए। हमें यह समझना होगा कि देशभक्ति नारों और सोशल मीडिया पोस्ट से आगे की चीज़ है। देश के प्रति सम्मान हमारे व्यवहार, जिम्मेदारियों और रोज़मर्रा के कामों में दिखाई देना चाहिए।

आइए, इस 15 अगस्त के बाद 16 अगस्त को भी तिरंगे और उन वीरों को याद रखें, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। आज़ादी एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।

तिरंगे का सम्मान 15 अगस्त को ही नहीं, हर दिन होना चाहिए।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.