पहले 1948 में मिलने वाली थी आजादी, फिर अचानक क्यों बदली तारीख?

15 अगस्त 1947 भारत की आजादी की वह तारीख, जो इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गई। यह दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की कहानी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त का ही दिन क्यों चुना गया? जबकि ब्रिटिश सरकार की शुरुआती योजना कुछ और थी।

20 फरवरी 1947 को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स में ऐलान किया था कि ब्रिटिश सरकार 30 जून 1948 तक भारत की सत्ता भारतीय हाथों में सौंप देगी। यानी मूल योजना के मुताबिक भारत को 1948 के मध्य तक आजादी मिलनी थी। लेकिन देश के तेजी से बदलते राजनीतिक और सामाजिक हालात ने अंग्रेजों को अपनी योजना करीब 10 महीने पहले बदलने पर मजबूर कर दिया।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद नौसेना विद्रोह, श्रमिक आंदोलनों और भारतीय सैनिकों में बढ़ते असंतोष ने ब्रिटिश सरकार को यह समझा दिया था कि भारत पर लंबे समय तक शासन करना अब मुश्किल है। इसी बीच महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना आजाद और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के संघर्ष ने आजादी की मांग को पूरे देश में मजबूत कर दिया था।

मार्च 1947 में लॉर्ड लुई माउंटबेटन भारत के आखिरी वायसराय बनकर दिल्ली पहुंचे। उन्हें सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय उनके पास जून 1948 तक का समय था, लेकिन देश में हिंदू-मुस्लिम तनाव और सांप्रदायिक हिंसा बढ़ रही थी। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर भी सहमति नहीं बन पा रही थी। माउंटबेटन को डर था कि अगर सत्ता हस्तांतरण में ज्यादा देरी हुई तो हालात गृहयुद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।

इसके बाद 3 जून 1947 को माउंटबेटन प्लान सामने आया। इसके तहत ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में बांटने का फैसला किया गया। कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने इस योजना को स्वीकार कर लिया। जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद ने Indian Independence Act 1947 पारित किया, जिसके तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्र राष्ट्र बनने का रास्ता साफ हुआ।

अब सवाल आता है कि आखिर 15 अगस्त ही क्यों? इसका संबंध द्वितीय विश्वयुद्ध की एक बड़ी घटना से था। 15 अगस्त 1945 को जापान ने मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण किया था। जापानी सम्राट हिरोहितो ने रेडियो संदेश के जरिए पॉट्सडैम घोषणा को स्वीकार करने और युद्ध समाप्त करने का ऐलान किया था। इस दिन को मित्र राष्ट्रों की जीत के संदर्भ में V-J Day यानी Victory over Japan Day के तौर पर याद किया गया।

लॉर्ड माउंटबेटन द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में मित्र राष्ट्रों के सुप्रीम कमांडर रहे थे और जापान का आत्मसमर्पण उनके सैन्य करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक था। इसलिए 15 अगस्त उनके लिए खास तारीख थी। माउंटबेटन ने इसी तारीख को भारत को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए चुना।

हालांकि, सत्ता हस्तांतरण की जल्दबाजी का एक बेहद दर्दनाक परिणाम भी सामने आया। भारत के विभाजन के साथ बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हुआ। सीमा रेखा की घोषणा देर से होने के कारण लाखों लोग अचानक अपने घरों से विस्थापित हुए और व्यापक सांप्रदायिक हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।

भारत की स्वतंत्रता का ऐतिहासिक समारोह 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा में आयोजित हुआ। रात 12 बजे ब्रिटिश शासन का अंत हुआ और भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। इसी ऐतिहासिक अवसर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ यानी ‘नियति से साक्षात्कार’ भाषण दिया।

इस तरह 15 अगस्त 1947 सिर्फ भारत की आजादी की तारीख नहीं बनी, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के अंत, देश के विभाजन की त्रासदी और एक स्वतंत्र भारत के जन्म की ऐतिहासिक निशानी बन गई।

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