वो ज़माना जब तलाक का मतलब था पति की पूरी संपत्ति पत्नी के नाम, जेब में नहीं बचती थी एक भी कौड़ी

BY ANJALI SHUKLA 

आज भले ही एलिमनी को लेकर अदालतों में सालों लड़ाई चलती हो और लोग कहते हों कि “कानून महिलाओं के पक्ष में है”, लेकिन ये विवाद नया नहीं है। आज से 5,000 साल पहले प्राचीन मिस्र में तलाक पति के लिए किसी सज़ा से कम नहीं होता था।

वहाँ शादी का समझौता घर पर ही लिखा जाता था, पर उसमें पत्नी को इतना अधिकार दिया जाता था कि अगर रिश्ता टूटे तो पति खाली हाथ रह जाता था।संपत्ति हो या पैसा तलाक के बाद सब कुछ पत्नी का हक़ माना जाता था, और पति के पास कुछ भी नहीं बचता था।

कैसे काम करता था ये नियम?

क्या आप जानते है की प्राचीन Egypt में महिलाओं को बेहद ऊँचा दर्जा दिया जाता था,और शादी से पहले तैयार होने वाले “मैरेज कॉन्ट्रैक्ट” में यह साफ तय होता था कि तलाक होते ही पति की पूरी संपत्ति चाहे वह शादी से पहले की हो या बाद की पत्नी को मिल जाएगी। इसमें घर, जमीन, सोना-चांदी, नौकर, यहाँ तक कि कपड़े तक शामिल होते थे।

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसके लिए किसी अदालत की आवश्यकता नहीं होती थी। जैसे ही पति तलाक बोल देता था, उसी क्षण उसकी हर चीज़ पत्नी की मानी जाती थी, और कई बार तो उसे अपने ही घर से बाहर निकल जाना पड़ता था क्योंकि घर भी अब उसका नहीं रहता था।

पावरफुल होती थी महिलाएं

प्राचीन मिस्र में महिलाओं को माँ, पत्नी और घर की संरक्षक के रूप में बेहद सम्मान मिलता था। देवी आइसिस को परिवार की रक्षक मानने वाली इस सभ्यता में माना जाता था कि घर और बच्चे संभालने की ज़िम्मेदारी महिला की होती है, इसलिए शादी टूटने पर असली नुकसान उसी का होता है इसी सोच ने महिलाओं को मजबूत कानूनी अधिकार दिए।

मिस्र में महिलाएँ संपत्ति की मालकिन बन सकती थीं, व्यापार कर सकती थीं, जमीन खरीद-बेच सकती थीं और अदालत में खुद मुकदमा लड़ सकती थीं। इतना ही नहीं, कई रानियों जैसे हत्शेप्सूत और क्लियोपेट्रा ने फिरौन की गद्दी पर शासन भी किया था। 

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