भारत–यूरोपीय संघ की ऐतिहासिक ट्रेड डील: नौकरियां, निवेश और बड़ा मार्केट!

भारत–यूरोपीय संघ की ऐतिहासिक ट्रेड डील में भारत सरकार और 27 देशों का समूह यूरोपीय यूनियन शामिल है। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं।

क्या होने जा रहा है

भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसे अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावशाली ट्रेड डील माना जा रहा है, जिसे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा है।

समय-सीमा और कार्यक्रम

24 से 28 जनवरी 2026 तक यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर रहेगा। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत के बाद 27 जनवरी को प्रधानमंत्री के साथ बैठक और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में डील की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।

स्थान और कूटनीतिक महत्व

नई दिल्ली में होने वाली यह घोषणा भारत–यूरोप संबंधों में नई ऊंचाई जोड़ेगी। गणतंत्र दिवस पर EU नेताओं की मौजूदगी दोनों पक्षों के मजबूत रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती है।

डील की ज़रूरत क्यों पड़ी

वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बीच भारत को नए और भरोसेमंद बाजार की आवश्यकता थी। यह समझौता व्यापारिक विविधता बढ़ाने, आर्थिक दबाव कम करने और रणनीतिक संतुलन साधने में मदद करेगा।

भारत को कैसे होगा फायदा

इस समझौते से भारत–EU व्यापार मौजूदा ₹11.8 लाख करोड़ से बढ़कर करीब 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, स्टार्टअप्स और निर्यात उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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