अरहर और उड़द पर शून्य आयात शुल्क, पीली मटर पर 30% रहेंगे

भारत सरकार ने अरहर और उड़द पर शून्य आयात शुल्क जारी रखा है, जबकि पीली मटर पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क अभी भी लागू रहेगा। यह फैसला घरेलू उत्पादन में गिरावट, अल नीनो के कारण कम वर्षा की संभावना और पश्चिम एशिया में संकट के चलते प्रभावित आपूर्ति शृंखला को देखते हुए लिया गया है।

इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने कहा कि इस नीति से उद्योग को लंबी अवधि की योजना बनाने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार, 2026-27 में भारत में दलहन का आयात 50 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के स्तर के करीब होगा। इस वित्त वर्ष में दलहन का आयात पिछले साल के 73 लाख टन से घटकर लगभग 52.3 लाख टन रहने का अनुमान है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अरहर और उड़द के मुक्त आयात को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। पीली मटर के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और बंदरगाह प्रतिबंध हटाकर इसे भी मुक्त श्रेणी में रखा गया है, बशर्ते बिल ऑफ लेडिंग इसी तिथि तक जारी हो और ऑनलाइन आयात पंजीकरण अनिवार्य हो।

घरेलू उत्पादन में गिरावट लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। 2025-26 में अरहर का उत्पादन 4.66 प्रतिशत घटकर 34.55 लाख टन हो गया, जबकि उड़द का उत्पादन खरीफ में 10.7 प्रतिशत और रबी में 8.14 प्रतिशत घटा। अल नीनो के चलते खरीफ सीजन में कम वर्षा की संभावना और पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ी माल भाड़ा और बीमा लागत ने सरकार को आयात शुल्क नीति जारी रखने के लिए मजबूर किया।

दलहन पर शुल्क ढांचे की बात करें तो अरहर और उड़द पर शून्य आयात शुल्क है, चना और मसूर पर 10 प्रतिशत और पीली मटर पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लागू है। कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत का कुल दलहन आयात 65.69 लाख टन रहा, जो 2024 में 68.75 लाख टन था। पीली मटर के आयात में कमी आई, जबकि उड़द, चना और अरहर के आयात में वृद्धि हुई।

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