भारत की कूटनीतिक बढ़त: अमेरिका और सऊदी में मजबूत पकड़, पाकिस्तान की रणनीति हुई फेल

भारत और अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते ने वैश्विक राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। इस समझौते के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाया गया 50% टैरिफ घटाकर 18% कर दिया। इसके तुरंत बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका पहुंचे, जहां उन्होंने क्रिटिकल मिनरल्स पर पहली मंत्री स्तरीय बैठक में हिस्सा लिया और अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सऊदी अरब के दौरे पर हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पाकिस्तान और सऊदी के बीच हाल ही में रक्षा समझौता हुआ है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब इस समझौते को लेकर भारत को स्थिति स्पष्ट करेगा, साथ ही गाजा संकट जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।

पाकिस्तान की रणनीति इसके उलट रही। ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद पाकिस्तानी नेतृत्व ने उन्हें खुश करने के लिए हर संभव कोशिश की—चाहे नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन हो या खनिज संसाधनों की पेशकश। इसके बावजूद अमेरिका ने भारत के साथ व्यावहारिक और संतुलित समझौता किया, जबकि पाकिस्तान को कोई ठोस लाभ नहीं मिला।

भारत ने न तो दबाव में आकर नीतियां बदलीं और न ही अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किया। रूस से तेल खरीद जारी रखने से लेकर व्यापार वार्ता में सख्त रुख अपनाने तक, भारत ने साफ दिखाया कि वह शर्तों पर नहीं, बराबरी पर रिश्ते निभाता है।

इसी बीच सऊदी अरब द्वारा पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करना भी पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। यह संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है, जबकि पाकिस्तान की चालें उलटी पड़ती दिख रही हैं।

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